एशियाई देशों में“पश्चिम की तीर्थयात्रा”को मिली लोकप्रियता

2019-05-14 19:07:00

“मैं कभी कभार विश्व के विभिन्न देशों में‘पश्चिम की तीर्थयात्रा’विषय वाले टीवी या फिल्म रचनाओं पर बड़ा ध्यान देता हूँ। पात्र का आकार, कहानी में सुधार और अभिनय की शैली..... अलग-अलग हैं। दक्षिण कोरिया और जापान में सौ साल पहले इस अपन्यास का अनुवाद कर लिया गया था, एक बार एक संगोष्ठी में भाग लेने के दौरान मैंने विदेशी कलाकारों के साथ बातचीत में कहा कि वानर सुन वूखोंग और भारत के हनुमान चचेरे भाई हैं। उन्होंने तालियां बजाते हुए स्वीकार किया। मुझे लगता है कि एशिया में सांस्कृतिक और कलात्मक रचनाओं के बीच आदान-प्रदान, आवाजाही और एकता अच्छी बात है।”

चीन में काम करने वाले जापानी नागरिक होशी काजुआकी“पश्चिम की तीर्थयात्रा”की चर्चा करते हुए

“एशियाई सभ्यताओं के बीच आदान-प्रदान व आपसी सीख और समान भाग्य वाले समुदाय”की थीम वाला एशियाई सभ्यताओं का संवाद सम्मेलन 15 मई को पेइचिंग में आयोजित होगा। 47 एशियाई देशों और दूसरे क्षेत्रीय देशों के प्रतिनिधि संबंधित गतिविधियों में भाग लेंगे। एशियाई सभ्यताओं के बीच आवाजाही और आपसी सीख की चर्चा करते हुए चीन में कार्यरत जापानी वासी होशी काजुआकी ने आशा जतायी कि सांस्कृतिक आदान प्रदान से चीन और जापान के बीच आपसी समझ बढ़ेगी। उन्होंने कहा:

“हालांकि चीन और जापान अलग देश हैं। लेकिन एशिया के दायरे में देखा जाए, तो हम सब एशियाई वासी हैं। अगर इस बड़े वातावरण में एक दूसरे की संस्कृति को समझा जाए, तो दोनों देशों के विकास को संवर्धन मिलेगा।”

वहीं, अखिल ने आशा जताई कि एशिया में सभ्यताओं के बीच आवाजाही और आपसी सीख के माध्यम से विश्व में एशिया की प्रभावशाली शक्ति और बढ़ेगी। उन्होंने कहा:

“जैसे कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा कि 21वीं सदी एशिया की सदी है, तो मैं देखता हूं कि आने वाले समय में एशिया का पूरी दुनिया को चलाने का रोल बहुत ही प्रभावशाली और मजबूत रहेगा”

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