टिप्पणी:चीन-अमेरिकी आर्थिक और व्यापार विचार-विमर्श के तीन सत्यों पर प्रकाश डाला है

2019-06-02 20:10:00

चीनी राज्य परिषद के समाचार कार्यालय ने 2 जून को "चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापार विचार-विमर्श पर चीन का रुख" शीर्षक श्वेत पत्र जारी किया। जिसने चीन-अमेरिका व्यापार घर्षण के प्रभाव, अमेरिका द्वारा अपने वचनों को तोड़ा जाने तथा व्यापार वार्ता के प्रति चीन के सैद्धांतिक रुख के तीन दृष्टि से चीन और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता संबंधित सत्यों पर प्रकाश डाला है।

बीते एक साल में चीन और अमेरिका के बीच कुल ग्यारह चरणों की वरिष्ठ वार्ताएं आयोजित की गयी हैं। लेकिन अमेरिका ने बार-बार अपने वचनों को तोड़ दिया, चीनी मालों को अधिक कर वसूली लगाने का फैसला लिया और वार्ता में असफल होने का दोष चीन पर लगा दिया।

चीनी जनता के हितों और विकास अधिकार की रक्षा करने के लिए चीन ने वार्ता के दौरान संयम का रुख अपनाया। लेकिन इस का मतलब नहीं है कि चीन अपने के ऊपर अनुचित मांग करने और बदनाम लगाने का स्वीकार कर सकेगा। 2 जून को प्रकाशित श्वेत पत्र का उद्देश्य विश्व को चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता की सच्चाई का परिचय देना है, और महत्वपूर्ण सवालों पर चीन की रियायत न देने की कल्पना जाहिर करना है। ताकि इससे चीन के खिलाफ़ अत्यधिक दबाव देने वाले व्यक्तियों को अपनी कल्पनाओं से त्याग दिया जा सके।

इस श्वेत पत्र में चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता से संबंधित तीन सत्यों पर प्रकाश डाला गया है।

पहला है कि चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता के असफल होने का कारण यही है कि अमेरिका ने तीन बार अपने वचनों को तोड़ा है। अमेरिका ने वार्ता के असफल होने का दोष चीन पर लगाना चाहा। लेकिन तथ्य यह है कि अमेरिका ने ईमानदार रुख को छोड़कर चीन को अत्यधिक दबाव डाला और इसी वजह से वार्ता विफल हुआ। श्वेत पत्र के अनुसार अमेरिका ने वर्ष 2018 के मार्च, वर्ष 2018 के मई और वर्ष 2019 के मई में तीन बार अपने वचनों को तोड़ दिया। अमेरिका द्वारा अनुचित मांग की जाने से चीन को विवश होकर जवाबी कदम उठाना पड़ा।

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