(इंटरव्यू-कौंसुल जनरल) भारत को जानने व समझने के लिए उत्सुक हैं चीनी लोग

2019-06-05 15:40:00

हमें पक्का विश्वास है कि जब कोई भी सभ्यता, कोई भी देश भारतीयता को समझ लेगा तो भारत के प्रति उसके नजरिए में मूलभूत परिवर्तन आ जाएगा। तो हमने यह सोचा कि शंघाई के विश्वविद्यालय में हिंदी पढ़ाई जाती है। यहां पर हमारे पास संसाधन भी उपलब्ध हैं, साथ ही भारतीय समुदाय के लोगों का सहयोग भी हमें मिला हुआ है। तो हम क्यों न इसे एक आंदोलन के रूप में लें, क्यों न हम उनकी ऊर्जा को एक नई दिशा दें। जब मैं नवंबर 2017 में यहां आया, तभी से मेरे दिमाग में यह विचार था कि हिंदी के बारे में हमें कुछ करना चाहिए। थोड़े ही समय में हम लोगों को संगठित कर एक मंच पर लाए।

चीन के बारे में मेरा जो निजी विचार है तो अधिकतर चीनी भारत को महात्मा बुद्ध से जोड़कर देखते हैं। महात्मा बुद्ध के काल के बाद बहुत समय बीत चुका है। हाल के दौर में यहां के लोग भारत को भारतीय फिल्मों के नजरिए से देखते हैं। इसके साथ ही नए दौर में लोगों ने हमें एक आईटी सुपरपावर और दुनिया के प्रसिद्ध दवा निर्माता देश के रूप में भी जाना है। हम चाहते हैं कि भारत के बारे में चीनी लोगों तक जानकारी शुद्ध रूप में पहुंचे। कहने का मतलब है कि यहां के नागरिकों को फर्स्ट हैंड इंफॉर्मेशन सटीक रूप में मिलनी चाहिए।

अनिल आज़ाद पांडेय

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