टिप्पणी :चीनी अर्थव्यवस्था पर विश्व की निर्भरता बढ़ रही है

2019-07-08 19:13:00

मेकिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट ने हाल ही में रिपोर्ट जारी कर बताया कि वर्ष 2000 से वर्ष 2017 तक चीनी अर्थव्यवस्था पर विश्व की निर्भरता का सूचकांक 0.4 से बढ़कर 1.2 तक जा पहुंचा। यह आर्थिक भूमंडलीकरण का अनिवार्य परिणाम है ।इस से ज़ाहिर है कि चीन विश्व में पिघलने के साथ विश्व आर्थिक वृद्धि बढ़ा रहा है और चीनी अर्थव्यवस्था पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का विश्वास निरंतर मज़बूत हो रहा है।

विश्व बैंक के हिसाब के अनुसार वर्ष 2012 से वर्ष 2016 तक विश्व आर्थिक वृद्धि में चीन का योगदान 34 प्रतिशत से अधिक रहा, जो अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान के कुल योगदान से भी अधिक था ।चीन द्वारा विश्व को योगदान देने की प्रक्रिया में चीनी अर्थव्यवस्था पर विश्व की निर्भरता कदम दर कदम बढ़ रही है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं।

सबसे पहले ,चीन का विश्व में सबसे बड़ा उपभोग बाज़ार है और सबसे बड़े पैमाने वाला मध्यम वर्ग समुदाय है। उपभोग की उन्नति का रुझान स्पष्ट रूप से दिखता है ,जो विश्व आर्थिक वृद्धि को निरंतर प्रेरणा देता है । मेकिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट ने विश्व बैंक के आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2010 से 2017 तक विश्व के पारिवारिक उपभोग की वृद्धि में चीन का योगदान 31 प्रतिशत था। एक तरफ चीन बड़ी मात्रा वाले उत्पादों के आयात से अन्य देशों की आर्थिक वृद्धि को प्रेरणा देता है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2001 से 2017 तक चीन के वस्तु आयात की रकम में सालाना वृद्धि दर 13.5 प्रतिशत दर्ज हुई, जबकि विश्व की औसत स्तर 6.9 प्रतिशत था ।दूसरी तरफ चीन का विशाल बाजार विदेशी उद्यमों के लिए एक विशाल मौका है।

दूसरा, चीन विश्व में एकमात्र ऐसा देश है, जिसके पास संपूर्ण औद्योगिक श्रृखंला है। चीन की सप्लाई चेन का स्पष्ट लाभ है। मेकिंसे ग्लोबल इंस्टीट्यूट ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विश्व के लगभग सभी व्यवसाय कुछ न कुछ हद तक चीन पर निर्भर हैं। पड़ताल में चुने गये 20 व्यवसायों में से 17 व्यवसायों में चीन के उपभोग का अनुपात 20 प्रतिशत से अधिक है।

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