टिप्पणी:ताइवान सवाल से चीन को दबाने की कार्रवाई खतरनाक है

2019-07-10 11:28:00

अमेरिका ने हाल ही में ताइवान को 2.22 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य हथियार बेचने की पुष्टि की। चीन ने इस पर कड़ी आपत्ति जतायी और सख्त लहजे में विरोध किया। अमेरिका की कार्रवाई से एक चीन के सिद्धांत तथा तीन चीन-अमेरिका विज्ञप्तियों का उल्लंघन होता है। साथ ही ओसाका में चीन और अमेरिका दोनों राजनेताओं के बीच संपन्न सहमतियों के विरूद्ध में भी है। अमेरिका की इस कार्रवाई से चीन के अन्दरूनी मामलों में हस्तक्षेप किया गया है।

इधर के अनेक सालों में अमेरिका ने एक चीन के सिद्धांत तथा तीन चीन-अमेरिका विज्ञप्तियों का पालन किया है। यानी अमेरिका इस बात को मानता है कि चीन लोक गणराज्य चीन की एकमात्र कानूनी सरकार है और ताइवान चीन का एक भाग है। सन 1982 में संपन्न विज्ञप्ति के मुताबिक अमेरिका ताइवान को हथियारों की बिक्री धीरे-धीरे कम करेगा। लेकिन अमेरिका ने “ताइवान के साथ संबंध” शीर्षक कानून से थाइवान को हथियार की बिक्री को कानूनी बनायी। तबसे यह बिक्री चीन और अमेरिका के बीच संबंधों पर बुरा प्रभाव डालने वाला तत्व बना। ट्रम्प सरकार ने इधर दो सालों में ताइवान को चार बार हथियार बिक्री की पुष्टि की है जिसका प्रतीक है कि वह ताइवान सवाल पर चीन के खिलाफ दबाव डालना चाहता है। इस के अतिरिक्त अमेरिकी संसद के दो सदनों में “ताइवान यात्रा कानून” पारित कर सरकारी अफसरों के थाइवान जाने का द्वार खोल दिया। फिर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में“ताइवान गारंटी कानून”पारित किया गया। लेकिन अमेरिका ने क्यों बार-बार "ताइवान कार्ड" खेला है?इस के पीछे यह तथ्य है कि अमेरिका चीन के विकास से चिन्तित है। चीन-अमेरिका संबंधों में समस्याएं होने की स्थिति में चीन को दबाने के लिए अमेरिका ने एक बार फिर "ताइवान कार्ड" खेला है।

लेकिन अमेरिका के ताइवान सवाल के जरिये चीन को दबाने की साजिश विफल होगी। हां, ताइवान में कुछ ही लोग अमेरिका के बल से चीनी मुख्यभूमि का विरोध करने में सलंग्न हैं। लेकिन ये लोग आर्थिक वैश्विकरण तथा जनमत का विरोध नहीं कर सकेंगे। अभी तक ताइवान और मुख्यभूमि के बीच उद्योग श्रृंखला और आपूर्ति श्रृंखला प्रणाली लागू की गयी है। मुख्यभूमि ताइवान के लिए सबसे बड़ा व्यापारी सहपाठी, बाजार और निवेश गंतव्य है। वर्ष 2018 में दोनों पक्षों की व्यापार रकम 2 खरब अमेरिकी डॉलर तक रही है। इसलिए ताइवान में कुछ मीडिया का कहना है कि ताइवान अमेरिका के हाथों में सौदेबाजी की चिप है। अगर ताइवान को लगता है कि वह अमेरिका के सहारे अपने हित की रक्षा कर सकेगा, तो यह सोच बिल्कुल सरल है। 40 सालों के लिए चले रुपांतर और खुलेपन के बाद चीनी राष्ट्रीय पुनरुत्थान होने का लक्ष्य सामने दिख रहा है। दोनों तटों के बीच शांतिपूर्ण एकीकरण होने का आधार भी मजबूत हो गया है। दुनिया में अधिकांश देशों ने ताइवान के साथ राजनयिक संबंधों को खत्म किया है। एक चीन के सिद्धांत को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में व्यापक समर्थन प्राप्त हो गया है। इन से यह साबित है कि चीन का पुनरेकीकरण होने का रूझान अनिवार्य है।

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