भारतीय पत्रकार की नजर में चीन की सफलता के 70 साल

2019-09-30 16:39:00

आज से 70 साल पहले, सन् 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना यानी चीन लोक गणराज्य की स्थापना हुई और देखते ही देखते कुछ ही दशकों के भीतर यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई। चीन को आर्थिक, तकनीक और वैज्ञानिक क्षेत्र में मिली उल्लेखनीय सफलता अन्य देशों, विशेष रूप से विकासशील देशों के लिए विचार के योग्य है।

पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना के ठीक बाद, नए देश को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिस पर तत्काल ध्यान देने की बड़ी आवश्यकता थी। दूसरे विश्व युद्ध के दौरान जापान के साथ युद्ध से तबाह होने वाला यह एशियाई देश गरीब था और सकल उत्पादन की तुलना में इसकी विशाल आबादी कमजोर थी। देश की नीतियां तब कृषि पर आत्मनिर्भरता पर ही केंद्रित थीं, लेकिन एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने के लिए यह पर्याप्त नहीं था।

सन् 1978 में, चीन ने आधुनिकीकरण और औद्योगिकीकरण के एक नए युग की शुरुआत की और व्यापक सुधारों और खुलेपन के आधार पर एक नीति अपनाई। चीन जिस आबादी को अपने विकास का रोड़ा मानता था, उसे अपनी शक्ति बनायी और सस्ते मजदूरों का लाभ दिखाते हुए विदेशी निवेशकों को लुभाया। आधुनिक चीन के मुख्य वास्तुकार, तंग श्याओफिंग, जिन्होंने राष्ट्र प्रमुख और कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव के रूप में पद संभाला, ने चार क्षेत्रों जैसे कि कृषि, उद्योग, विज्ञान और प्रौद्योगिकी और सैन्य से निपटने की रणनीति तैयार की। चीन ने जिस तरह से अर्थव्यवस्था, विज्ञान और टेकनोलॉजी, राष्ट्रीय रक्षा, और व्यापक राष्ट्रीय ताकत के मामले में ऐतिहासिक छलांग लगायी, वो दुनिया के तमाम देशों के लिए ध्यानाकर्षण का केंद्र बन गया।

शिक्षा के महत्व के बारे में जागरूक होने के कारण चीनी नेता तंग श्याओफिंग ने अपनी दीर्घकालिक योजनाओं में शिक्षा पर बड़ा जोर दिया। उन्होंने हजारों चीनियों को विदेश में अध्ययन करने और देश के निर्माण और आधुनिकीकरण में योगदान करने के लिए भेजा।

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