ल्यांग च्यहो (भाग2)

2018-07-02 16:51:00

ल्यांग च्यहो (भाग2)

मैं वहां जाकर एक किसान बना। वहां मैंने सात साल बिताये।”

महासचिव शी चिनफिंग की ल्यांच्याहो में अपने शिक्षित युवा जीवन की कहानी बताई। जन नेता के आरंभिक आदर्श की खोज करें। गांव ल्यांच्याहो में हुए ज़मीन-आसमान के बदलाव को रिकॉर्ड करें। और आगे बढ़ाने का विश्वास प्रोत्साहित करें।

यह कहानी 6 भागों में प्रस्तुत की जाएगी ।यह है दूसरा भाग ।

अपने दिल के भीतर शी चिनफिंग हमेशा अपने को येनएन वासी समझते हैं ।

14 अगस्त 2004 को तत्कालीन च च्यांग प्रांत की सीपीसी समिति के सचिव शी चिनफिंग ने श्येनएन रेडियो और टीवी स्टेशन के साथ एक विशेष साक्षात्कार में यह पूछे जाने पर कि क्या अपने को एक शतप्रतिशत येनएन वासी समझते हैं ,जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मैं सचमुच अपने को येनएन वासी समझता हूं ,क्योंकि वहां पर मेरे जीवन का एक अहम पड़ाव है। मेरे कई बुनियादी विचार और कई बुनियादी विशेषताएं येनएन में बनी थीं। सो स्वभावतः मैं अपने को येनएन वासी समझता हूं।

22 दिसंबर 1968 को अध्यक्ष माओ त्सेतुंग ने शिक्षित नौजवानों से अपील की कि वे गांव जाकर किसानों से शिक्षा प्राप्त करें। यह बहुत जरूरी है। देशभर में 1 करोड़ 70 लाख शिक्षित युवा अध्यक्ष माओ की अपील के तहत शहर से रवाना होकर गांव चले गये और अविस्मर्णीय जीवन यात्रा शुरू की।

शी चिनफिंग उन बड़ी संख्या वाले प्रवासी युवाओं में से एक थे। उनका प्रस्थान स्थल पेइचिंग और गंतव्य पवित्र क्रांतिकारी स्थान येनएन था।

13 जनवरी 1969 को पेइचिंग रेलवे स्टेशन में भीड़भाड़ नज़र आ रही थी। प्रशिक्षित युवाओं की विशेष रेलगाड़ी पहले दक्षिण की ओर हनान प्रांत चली गयी, फिर लोंगहाई रेलवे लाइन से पश्चिम की ओर गयी और शीएन पहुंचने के बाद उत्तर की ओर चली और थुंग छुएं पहुंची। थुंग छुएं में नाश्ता करने के बाद शिक्षित युवा ट्रक से येनएन रवाना हो गये।

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