ल्यांगच्याहो (भाग 3)

2018-07-03 11:52:00

साल 1974 के जनवरी में पीली मिट्टी पठार में सर्दियों के दिनों चीनी पारंपरिक त्योहार वसंतोत्सव आने वाला था। ल्यांच्याहो के गांववासी तैयारियों में व्यस्त थे।

उस समय शी चिनफिंग अभी-अभी कम्युनिस्ट पार्टी के अधीन स्थानीय उत्पादन दल की समिति के महासचिव बने। वे ल्यांगच्याहो में सुधार लाने के बारे में सोच रहे थे।

एक दिन शी चिनफिंग समाचार पत्र पढ़ रहे थे। 8 जनवरी को जन दैनिक अख़बार में प्रकाशित सछ्वान प्रांत में मीथेन गैस से जुड़ी दो रिपोर्टों पर उनकी नज़र गई। उन्होंने सोचा कि अगर हमारे यहां मीथेन गैस से खाना पकाया जाए और रोशनी लायी जाए, तो कितना अच्छा होगा।

ल्यांगच्याहो दूरस्थल पर स्थित है, कोयले की प्राप्ति के लिए 50 किलोमीटर दूर स्थित कोयले की खान तक जाना पड़ता था। लम्बे समय में स्थानीय लोग पेड़ों को काटकर, उनकी लकड़ियों को जलाकर खाना पकाते थे, जिससे मिट्टी के अभाव की स्थिति पैदा हुई और कृषि विकास पर कुप्रभाव पड़ा। अगर मीथेन गैस का प्रयोग किया जाए, तो ग्रामीण ऊर्जा मुद्दे को दूर किया जा सकेगा और उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। गांव में शौचालय साफ़ कर सार्वजनिक स्वास्थ्य स्तर भी उन्नत होगा। इसके साथ ही कृषि उर्वरक मामले का भी निपटारा किया जा सकेगा और अनाज की उत्पादन क्षमता भी उन्नत होगी। मीथेन गैस, ग्रामीण क्षेत्र में उत्पादन और जीवन से जुड़े मामलों के निपटारा करने की एक चाबी है।

मीथेन गैस से सुनहरे भविष्य के प्रति शी चिनफिंग को प्रेरणा मिली। लेकिन उन्होंने शांत होकर यह सोचा कि दक्षिण पश्चिमी चीन स्थित सछ्वान प्रांत और उत्तर पश्चिमी भाग में स्थित उत्तरी शानशी प्रांत के बीच मौसम का बड़ा फर्क है। सछ्वान की यह चाबी उत्तरी शानशी के ताले के लिए अनुकूल है कि नहीं?

इस सवाल के जवाब की प्राप्ति के लिए शी चिनफिंग ने खुद सछ्वान जाने का फैसला किया। उन्होंने पैदल ही 40 किलोमीटर दूर स्थित कांउटी शहर जाकर मीथेन गैस के विकास से जुड़े अपने सुझाव और सछ्वान में सीखने वाली योजना को सीपीसी कांउटी शाखा समिति के महासचिव के सामने प्रस्तुत की। उन्हें पुष्टि मिली। वसंतोतस्व के बाद शी चिनफिंग दूसरों से पैसे उधार लेकर अन्य दो सहकर्मियों के साथ सछ्वान गए।

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