चीन-अमेरिका व्यापार में केवल एक सच्चाई

2018-07-13 11:42:10

10 जुलाई को अमेरिकी व्यापारिक प्रतिनिधि कार्यालय ने 301 जांच से जुड़ा बयान जारी कर फिर एक बार चीन को बदनाम करने की कोशिश की। इसमें शामिल आंकड़े व नियम बहुत भ्रमित करते हैं। लेकिन झूठ को छिपाया नहीं जा सकता।

12 जुलाई को चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने बयान जारी कर चीन के प्रति अमेरिका द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया। और कहा कि अमेरिका ने सच्चाई को तोड़मरोड़ कर पेश किया, जो अविश्वसनीय है। अगर अमेरिका को आंकड़ों का खेल पसंद है, तो चीन के पास बहुत आंकड़े हैं, जिसे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भी देखना चाहिये।

व्यापार घाटे के मामले पर चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि इस मसले का मुख्य कारण यह है कि अमेरिका में बचत दर बहुत कम है। उधर अमेरिकी डॉलर अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख रिजर्व मुद्रा की भूमिका अदा कर रहा है। इसके अलावा अमेरिका ने शीत युद्ध विचार की दृष्टि से अपने श्रेष्ठ उच्च तकनीकी उत्पादों के निर्यात पर जबरदस्त प्रतिबंध लगाए। उक्त तीन कारण तो चीन व अमेरिका के बीच व्यापारिक असंतुलन के मुख्य कारण हैं।

बौद्धिक संपदा के मामले पर अब चीन में बौद्धिक संपदा संरक्षण में कॉपीराइट, ट्रेडमार्क, पेटेंट, व्यापारिक गुप्त, भौगोलिक संकेत, नई पौधों की विविधता, एकीकृत सर्किट डिजाइन आदि शामिल हुए हैं। साथ ही बौद्धिक संपदा की रक्षा के लिये कानून, नीति-नियम, क्षेत्रीय नीति समेत विभिन्न स्तरीय कानूनी संरक्षण नेट भी बनाया गया है।

विवश होकर प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के मामले में वास्तव में यह एक बिल्कुल निराधार खबर है। चीन में कोई ऐसा नीति-नियम नहीं है कि अगर विदेशी पूंजी चीन में आना चाहती है, तो विवशता से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करना होगा। बीते 40 वर्षों में चीन ने विवशता से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण से जुड़े किसी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किये। और किसी विदेशी व्यापारी ने कभी इस बारे में आरोप नहीं लगाया।

बहुत स्पष्ट है कि अमेरिका दो मापदंडों से चीन के विकास को रोकना चाहता है। यह कार्रवाई पूरी तरह व्यापारिक प्रभुत्ववाद है।

चंद्रिमा

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