"बाजार से प्रौद्योगिकी के विनिमय" पर बदनाम क्यों किया

2018-07-13 19:14:12

चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध के दौरान अमेरिका ने इस बात पर चीन को लगातार बदनाम किया कि चीन ने अपने बाजार से विदेशी तकनीकों का विनिमय किया। लेकिन ऐसे विनिमय पर बदनाम लगाने का क्या आधार है?इसे साफ-साफ समझाने की जरूरत है।

"बाजार से प्रौद्योगिकी का विनिमय" सभी देशों के लिए सामान्य चुनाव है। विदेशी पूंजी को आकर्षित करने में उन्नतिशील तकनीकों और प्रबंधन अनुभवों का प्रयोग करना है, इसी आधार पर अंतर्राष्ट्रीय उत्पादन व्यवस्था और सेवा प्रणाली में शामिल किया जाए। यह विकासमान देशों के बाजार खुलने के काल में अपनाया गया आम उपाय है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की राष्ट्रीय सीमा नहीं है। मानव के सभ्यता विकास के इतिहास में आदान-प्रदान करने की आवश्यकता है। किसी भी देश को दूसरे देशों से सीखना पड़ता है। अमेरिका खुद भी वैज्ञानिक व तकनीकी सहयोग को बहुत महत्व देता है। अमेरिका ने विदेशी प्रतिभाओं को आकर्षित कर अपनी नवाचार व तकनीक के उन्नतिशील स्थान को मजबूत किया है। अमेरिका में फर्स्ट क्लास तकनीशियनों का एक तिहाई भाग विदेशी ही हैं। जापान और दक्षिण कोरिया ने भी विदेशों की उन्नतिशील तकनीक सीखकर शक्तिशाली विनिर्माण का विकास किया है।

चीन ने "बाजार से प्रौद्योगिकी के विनिमय" में अंतर्राष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन नहीं किया है। बौद्धिक संपदा की रक्षा को नवाचार का स्रोत माना जाता है। विश्व व्यापार संगठन ने बौद्धिक संपदा के संरक्षण को सैद्धांतिक नियम प्रकाशित किया है। चीन ने बौद्धिक संपदा अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अपने कानूनों और नियमों में लगातार सुधार किया है। वर्ष 2001 से चीन के द्वारा भुगतान किये गये बौद्धिक संपदा शुल्कों की वार्षिक वृद्धि दर 17 प्रतिशत तक जा पहुंची। बीते बीस सालों में चीन हमेशा सबसे अधिक विदेशी पूंजीनिवेश को आकर्षित करने का विकासमान देश बना है। नवीनतम पूंजी निवेश रिपोर्ट के मुताबिक चीन बहुराष्ट्रीय कारोबारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण निवेश गंतव्य है।

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