टिप्पणी:एक तरह की मैत्री का नाम है“चीन और अफ्रीका”

2018-07-25 16:13:02

टिप्पणी:एक तरह की मैत्री का नाम है“चीन और अफ्रीका”

चीन और अफ्रीका के बीच का फासला बहुत दूर है, लेकिन चीन-अफ्रीका पारंपरिक मैत्री और साझे भाग्य समुदाय दोनों को बहुत घनिष्ठ रूप से जोड़ा जाता है। इस प्रकार के सभी मौसम वाली मैत्री दोनों पक्षों के उच्च स्तरीय आवाजाही से जाहिर होता है। अब चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग दक्षिण अफ्रीका की यात्रा कर रहे हैं, इसके पूर्व उन्होंने सेनेगल, रवांडा का दौरा भी किया। यह पिछले 5 सालों में राष्ट्रपति शी की चौथी अफ्रीकी यात्रा है।

इसके साथ ही अफ्रीकी नेता एक के बाद एक चीन का दौरा करने आते हैं। गत मार्च में चीन में दो सत्र के सम्मेलन संपन्न होने के बाद कैमरून, नामीबिया और जिम्बाब्वे के राष्ट्रपतियों ने क्रमशः चीन की यात्रा की। ऐसा कहा जा सकता है कि इस वर्ष चीनी कूटनीति में“अफ्रीका वर्ष”माना जा सकता है। सितम्बर में पेइचिंग में चीन-अफ्रीका सहयोग मंच का पेइचिंग शिखर सम्मेलन आयोजित होगा। मौके पर चीन 50 से अधिक अफ्रीकी देशों के नेताओं के साथ मिलकर“बेल्ट एंड रोड”प्रस्ताव और अफ्रीका के विकास को जोड़ने की रूपरेखा बनाएंगे, जो चीन-अफ्रीका मैत्री जारी रखेगा और विकास का नया अध्याय जोड़ा जाएगा।

चीन-अफ्रीका मैत्री का कोर“समानता व आपसी लाभ”और“विकास व उभय जीत”है। “चीन अफ्रीका सहयोग मंच”हर तीन वर्ष में आयोजित मंत्री स्तरीय सम्मेलन है, जिसका आयोजन दोनों पक्षों के बीच बार-बार किया जाता है। यह मंच समान और संयुक्त भागीदारी की भावना दिखाता है। चीन द्वारा अफ्रीका के विकास को दी गई सहायता किसी अतिरिक्त शर्त के बिना है, जो अफ्रीका के समादर का प्रतीक है। चीनी बाज़ार अधिक से अधिक अफ्रीकी वस्तुओं के लिए खुल रहा है, चीन अफ्रीकी देशों में पुल और मार्ग जैसे आधारभूत संस्थापनों, औद्योगिक पार्क के निर्माण की सहायता दी, जिसका उद्देश्य अफ्रीकी देशों के औद्योगिकीकरण स्तर को उन्नत करना है। इन गतिविधियों से“विकास और उभय जीत”की विचारधारा जाहिर होती है।

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