शांगहाई में रहने वाले प्रवासी भारती

2018-08-09 14:46:00

शांगहाई में रहने वाले प्रवासी भारती

भारतीय समुदाय जहां भी रहता है वो अपने देश और अपनी संस्कृति से हमेशा जुड़ा हुआ रहता है, भारतीयों के इस काम में भारतीय दूतावास और कांसुलेट भी मदद करता है। अगर बात करें चीन की तो चीन की आर्थिक राजधानी शांगहाई में भारतीय प्रवासियों का इतिहास हमें पहले अफ़ीम युद्ध यानी वर्ष 1839 से ही मिलता है, शांगहाई और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले भारतीय लोग एक संघ बनाकर वर्ष भर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं जिसमें खेल कूद से जुड़े कार्यक्रम, नृत्य-संगीत, त्योहार भी शामिल हैं, अभी हाल ही में एक पुस्तक का संकलन किया गया है जिसमें शांगहाई और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले भारतीयों के अनुभव उसके द्वारा साझा किये गए हैं।

इस पुस्तक का शीर्षक है स्ट्रे बर्ड्स ऑन द हांगपू (Stray birds on the hangpu ) .... 18 अगस्त को इसका लोकार्पण किया जाएगा।

इन सभी कार्यक्रमों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने वाली शांगहाई की एक भारतीय सुश्री पल्लवी गोरे ने साक्षात्कार में बताया कि पहले उन्होंने शौकिया ये सब शुरु किया था लेकिन समय के साथ पता चला कि ये अपनेआप में पूरा समय लेने वाला काम है। हालांकि इसके साथ ही पल्लवी गोरे कई दूसरे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ ही खेल कूद और बच्चों के कार्यक्रमों को भी आयोजित करवाने में अहम भूमिका निभाती हैं, उन्होंने बताया की शांगहाई मराठी भाषा मंडल में भी वो कार्यरत हैं, जहां बाकी भारतीय लोगों के साथ मिलकर वो मराठी भाषा, त्योहार, नाट्य, नृत्य और संगीत से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन करवाती हैं। पल्लवी के साथ ही बाकी भारतीय लोग भी अपनी दिनचर्या से समय निकालकर इन कार्यक्रमों के आयोजन में हाथ बंटाते हैं, जिससे वे विदेशी धरती पर रहते हुए भी अपनी संस्कृति से जुड़ी रहें।

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