सुधार और खुलेपन से चीन ने किया “चमत्कार”

2018-11-20 14:31:03

सुधार और खुलेपन से चीन ने किया “चमत्कार”

आज से 40 साल पहले, चीन के महान नेता तंग श्याओफिंग ने एक ऐतिहासिक विचार पेश किया, वो यह था- "मन को सशक्त बनाएं, तथ्यों से सच्चाई लें और एकजुट होकर भविष्य का सामना करें।" इस विचार ने चार दशकों के सुधार और खुलेपन को जन्म दिया, जिससे चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। कुछ ही सालों में, चीन दुनिया के उन कुछ देशों के सूची में शामिल हो जाएगा, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद कम आय वाले से उच्च आय वाले की स्थिति में परिवर्तित हो गये।

ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों तक, पायलट कार्यक्रमों से देशव्यापी परियोजनाओं तक, आर्थिक पुनर्गठन से सुधार की व्यापक गहराई तक, जिस तरह से पिछले चार दशकों में चीन ने विकास की राह में तेज गति पकड़ी है, उसे “चमत्कार” ही कहा जाना चाहिए। आज के समय में, चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, सबसे बड़ा औद्योगिक उत्पादक, वस्तुओं का सबसे बड़ा व्यापारी, और सबसे बड़ा विदेशी मुद्रा भंडार धारक बन गया है।

जब चीन 1970 के दशक के अंत में अपनी गिरती हुई अर्थव्यवस्था के साथ गंभीर विनाश के कगार पर खड़ा था, तब देश ने आर्थिक विकास को केंद्रीय कार्य बनाया और सुधार और खुलेपन की नीति अपनायी। उसके बाद, चीन ने जिस तरह से अर्थव्यवस्था, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राष्ट्रीय रक्षा, और व्यापक राष्ट्रीय ताकत के मामले में एतिहासिक छलांग लगायी, वो दुनिया के तमाम देशों के लिए ध्यानाकर्षण का केंद्र बन गया।

सुधार और खुलेपन से चीन ने किया “चमत्कार”

आज, दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, चीन साल 2020 तक एक समृद्ध समाज के निर्माण के लक्ष्य को पूरा करने की ओर अग्रसर है। पिछले 40 सालों में, चीन के सकल घरेलू उत्पाद की औसत वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत रही, जो साल 2017 में 8,836 अमेरिकी डॉलर के प्रति व्यक्ति जीडीपी के साथ 12.84 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गई। इस दौरान चीन ने गरीबी के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में काफी बड़ा योगदान दिया है। उसने अपने देश के 70 करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी के चंगुल से बाहर निकाला।

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