टिप्पणी:चीन को समझने के लिए चाबी

2019-01-24 19:32:00

दूसरे देशों में रहने वालों में चीन के प्रति अकसर गलतफहमियां मौजूद रहती हैं। पश्चिमी देशों को चीन के विकास और चीन की नीतियों को समझने में अकसर कठिनाइयां होती हैं। इस सवाल को लेकर दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में भाग लेते हुए चीनी उप राष्ट्रपति वांग छीशान ने कहा कि इतिहास, संस्कृति और दर्शनशास्त्र में ही चीन को समझने की चाबी मौजूद है। इस का मतलब है कि चीन का इतिहास, संस्कृति और दर्शनशास्त्र सीखने से चीन के विकास और चीन की नीतियों की जानकारी प्राप्त कर सकता है।

चीन के स्वर्गीय नेता तंग श्याओ पींग की बात थी "विकास अंतिम शब्द ही है"। वर्तमान चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने भी अनेक बार कहा कि "विकास करना चीन में सभी समस्याओं को हल करने का आधार और कुंजी है"। चीन सरकार आर्थिक विकास के जरिये जन जीवन के सुधार को महत्व देती है। चीन ने इसी विचार में सिलसिलेवार आर्थिक व सामाजिक नीतियां तैयार की हैं। सन 1978 में चीन का जीडीपी 150 अरब अमेरिकी डालर रहा था जबकि गत वर्ष यह संख्या 136 खरब अमेरिकी डालर तक जा पहुंची है। चीन में भारी परिवर्तन के पीछे अनेक तत्व है, पर जन जीवन को महत्व देने की परंपरा और जन हितों को प्राथमिकता देने के विचार ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की है।

चीन ने गरीबी उन्मूलन को अत्यंत महत्व दिया और मानव के इतिहास में अभूतपूर्व प्रगतियां हासिल की हैं यानी कि 80 करोड़ चीनी लोगों ने गरीबी से छुटकारा पाया। अमेरिका की एडेलमैन कंपनी की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन के आम लोगों में सरकार के प्रति विश्वास दर 86 प्रतिशत तक जा पहुंची है, जो विश्व में सबसे अधिक है। इससे चीन के इतिहास में जन जीवन को महत्व देने वाली परंपरा का अर्थ जाहिर हुआ है।

उधर वैदेशिक संबंधों में चीन ने नये ढ़ंग वाले अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में धर्म और लाभ के प्रति सही विचारधारा अपनाने का विचार पेश किया। चीन के रुख से सहयोग से प्रतिद्वंद्विता का स्थान लेना चाहिये, और उभय जीत से शून्य-राशि के खेल का स्थान लेना चाहिये। क्योंकि सहयोग और उभय जीत का विचार चीनी राष्ट्र की पाँच हजार साल संस्कृति से आधारित है। यह विचार पश्चिम देशों के दर्शनशास्त्र, जैसे लोग जो पर्यावरण के अनुकूल है बच सकते हैं, से बिल्कुल अलग है। पश्चिमी देशों के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का नियम है कि हित के सामने सदैव दोस्त नहीं है। लेकिन चीन की परंपरा के मुताबिक धर्म के लिए लाभ को छोड़ा जा सकता है।

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