टिप्पणीः चीन-अमेरिका व्यापार संघर्ष के समाधान की कुंजी एक दूसरे की चिंताओं पर ध्यान देना

2019-05-11 16:36:00

टिप्पणीः चीन-अमेरिका व्यापार संघर्ष के समाधान की कुंजी एक दूसरे की चिंताओं पर ध्यान देना

11वें दौर की चीन-अमेरिका व्यापार उच्च स्तरीय वार्ता 10 मई को वाशिंगटन सम्पन्न हुई ।चीनी उप प्रधानमंत्री ल्यू ह ने वार्त के बाद बताया कि दोनों पक्षों ने अच्छा संपर्क और सहयोग किया। वार्ता टूटी नहीं है। इसके विपरीत यह वार्ता में सामान्य उतार चढ़ाव है ,जो अनिवार्य है। चीन भावी सलाह मशिवरे पर सावधानी से आशावान है।

इस वार्ता से पहले अमेरिका ने टैरिफ़ बढ़ाने की बात कही थी, जिससे वार्ता टूटने की चिंता पैदा हुई। ऐसे दबाव में चीनी प्रतिनिधि मंडल ने योजनानुसार अमेरिका जाकर 11वें दौर की वार्ता में भाग लिया। इससे चीन की सवाल सुलझाने की सदिच्छा प्रकट हुई है और दोनों देशों की जनता यहां तक कि पूरे विश्व की जनता के प्रति चीन का जिम्मेदाराना रुख़ भी ज़ाहिर हुआ है।

अमेरिका ने चीन पर समझौते के मसौदे के कुछ विषयों पर दोबारा वार्ता करने का आरोप लगाया। वह बिना परिणाम के वार्ता संपन्न होने की ज़िम्मेदारी चीन पर थोपने की चेष्टा कर रहा है। यह अन्यायपूर्ण है।

एक तरफ, वार्ता में विभिन्न पक्षों के विभिन्न विचार होना स्वाभाविक हैं और औपचारिक समझौता संपन्न करने के पहले परिवर्तन होना सामान्य भी है। दूसरी तरफ़, एक अरसे से अमेरिका कहता रहा है कि क्या चीन उसकी चिंताओं को दूर कर सकेगा या नहीं, जबकि चीन की चिंताओं पर वह कभी भी चर्चा नहीं करता ।यह पारस्परिक सम्मान और लाभ के सिद्धांत के विरुद्ध है और इस दौर की वार्ता में प्रगति नहीं मिलने का एक महत्वपूर्ण कारण भी है।

दोनों देशों की वार्ता के बारे में चीन की अपनी केंद्रीय चिंता है । इन सैद्धांतिक सवालों पर चीन रियायत नहीं कर सकता। पहला, चीन चाहता है कि बढ़ाए गए सभी करों को हटाना है ताकि द्विपक्षीय व्यापार सामान्य हो सके। दूसरा ,व्यापार खरीदारी सवाल पर अमेरिका ने बार बार चीन से अमेरिकी सामानों के आयात का विस्तार करने और ठोस रकम का वादा देने की मांग की है। लेकिन व्यापार में जबरन खरीदारी नहीं होनी चाहिए। चीनी उपभोक्ताओं को अपनी पंसद के उत्पाद चुनने का अधिकार है। इसके अलावा समझौते के मसौदे में दोनों पक्षों की मांग शामिल की जानी चाहिए और मसौदे की अभिव्यक्ति को चीनी जनता के लिए स्वीकार्य होना है और देश की प्रभुसत्ता और प्रतिष्ठा पर हानि नहीं पहुंच सकेगी।

पिछले एक साल में अमेरिका का टैरिफ़ बढ़ाने से चीनी अर्थव्यवस्था पर कुछ बुरा प्रभाव पड़ा है, लेकिन यह प्रभाव सीमित और पूरी तरह नियंत्रण में है ।इस पहली तिमाही में चीन की जीडीपी 6.4 प्रतिशत बढ़ी। वस्तु व्यापार का आयात-निर्यात इस साल के पहले 4 महीनों में 4.3 प्रतिशत बढ़ा।

भविष्य में चीन ईमानदारी से अमेरिका के साथ सलाह मशविरे की पूरी कोशिश करेगा। लेकिन वार्ता में एक दूसरे केंद्रीय हितों और चिंताओं का ख्याल रखा जाना है और समानता और पारस्परिक लाभ का सिद्धांत दिखाना है ।इस तरह चीन अमेरिका व्यापार वार्ता अंतिम चरण से गुजर सकेगी।(वेइतुंग)

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