चीन में हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

2019-05-11 20:06:00

चीन में हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

चीन में हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर शनिवार को शांगहाई में अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस दौरान चीन में हिंदी शिक्षण, अनुवाद और संचार माध्यमों में हिंदी के विकास, संभावनाओं और चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इसमें हिंदी के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों सहित कई प्रतिभागियों ने शिरकत की।

उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता भारतीय कौंसुल जनरल अनिल कुमार राय ने की। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में हिंदी शिक्षण का दायरा बढ़ रहा है। इसके साथ ही चीन में भी भारतीय भाषाओं का विस्तार हो रहा है। इस तरह की कोशिश जारी रहे तो एक-दूसरे को समझने में आसानी होगी।

वहीं पेकिंग विश्वविद्यालय के प्रो. च्यांग चिंगख्वेई ने अपने ही अंदाज में कहा कि हिंदी उनका जीवन है। वे इससे प्रेम करते हैं। उन्होंने कहा कि चीन में हिंदी को 77 साल हो गए। हालांकि चीन में सबसे प्राचीन विदेशी भाषा के तौर पर संस्कृत को जाना जाता है।

चीन में हिंदी के प्रचार-प्रसार को लेकर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन

जबकि वैज्ञानिक तकनीकी शब्दावली आयोग के अध्यक्ष व निदेशक प्रो. अवनीश कुमार ने कहा कि हिंदी भारत की संपर्क भाषा व्यवहारिक रूप से बन चुकी है। भारत के साथ संपर्क रखने वाली विदेशी सरकारें भी हिंदी कआवश्यकता महसूस करने लगी हैं।

राष्ट्रपति भवन के विशेष कार्याधिकारी डॉ.राकेश दुबे ने जोर देकर हिंदी और प्राचीन भारतीय भाषा और संस्कृति के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी हिंदी सहित अन्य क्षेत्रीय भाषाओं का नुकसान कर रही हैं।

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