टिप्पणीः शांतिकाल में भी चौकस रहे चीन

2019-05-19 15:37:00

टिप्पणीः शांतिकाल में भी चौकस रहे चीन

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने 16 मई को चीन के हुआवेइ कंपनी और संबंधित अन्य 70 उपक्रमों को निर्यात पाबंदी की सूची में शामिल करने की घोषणा की। जिससे हुआवेइ कंपनी के अमेरिकी उपक्रमों से तकनीक या उपकरणों को खरीदने पर पाबंदी लगायी गयी। इस कार्यवाई का मकसद हुआवेइ के मर्म-स्थल को तोड़ना, चीन के उच्च विज्ञान व तकनीक के विकास को रोकना और अमेरिका के वैज्ञानिक व तकनीक प्रभुत्व स्थान की रक्षा करना है।

लेकिन अमेरिका ने कल्पना नहीं की कि हुआवेइ कंपनी ने तुरंत अपना विकल्प प्रस्ताव शुरू किया ताकि हुआवेइ के अधिकांश उत्पादों की सामरिक सुरक्षा और अनवरत सप्लाई को सुनिश्चित की जा सके। अमेरिका के अति दबाव में हुआवेइ कंपनी ने लम्बे अरसे की तैयारी और संघर्ष व नवाचार की भावना से प्रबल जवाबी प्रहार किया।

विश्व के सबसे बड़े इंटरनेट उपकरण निर्माता होने के नाते हुआवेइ कंपनी ने 20 से ज्यादा सालों के अंतर्राष्ट्रीयकरण के विकास के बाद 170 देशों में अपना व्यवसाय शुरू किया और विश्व की एक तिहाई आबादी के लिए दैनिक टेलिकॉम मांग की सेवा दी। लेकिन अमेरिका में हुआवेइ कंपनी का विकास बहुत मुश्किल है। हुआवेइ कंपनी हमेशा अमेरिका के प्रमुख ऑपरेटरों के इंटरनेट बुनियादी संरचनाओं के बाहर निकाली गयी है।

इसके बावजूद भी अमेरिका चिंतित रहा। कारण यह है कि हाल में हुआवेइ की 5जी पेटेंट की संख्या विश्व के पहले स्थान पर रही। देखने में अमेरिका ने पाबंदी लगाने के बजाए होड़ करने से प्रतियोगिता में जीतने की बात कही, लेकिन वास्तव

में अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा के बहाने से हुआवेइ के खिलाफ़ पाबंदी लगायी और विश्व के अन्य देशों से भी धमकी देकर साथ साथ हुआवेइ के खिलाफ़ कार्यवाई करने के लिए समझाने की कोशिश की।

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