टिप्पणीः लगातार दबाव डालने से इसके विपरीत होगा

2019-06-22 16:09:00

अमेरिकी वाणिज्य मंत्रालय ने 21 जून को राष्ट्रीय सुरक्षा की वजह से सुगोन (Sugon) और च्यांगनान इंस्टीट्यूट ऑफ कंप्यूटिंग टेक्नॉलजी समेत पाँच चीनी इकाईयों को निर्यात नियंत्रण वाली इकाईयों की सूची में शामिल किया, जिससे इन इकाईयों पर अमेरिकी आपूर्तिकर्ताओं से पुर्जों की खरीददारी पर पाबंदी लगाई जाएगी। संबंधित निर्णय 24 जून से प्रभावी होगा।

यह हुआवेई कंपनी को इकाईयों की सूची में शामिल करने के बाद अमेरिका की फिर एक बार एकतरफा कार्रवाई है। इन पाँच चीनी कंपनियों का मुख्य व्यवसाय सुपर कंप्यूटर के विकास से संबंधित है। हाल में जारी टॉप 500 वैश्विक सुपर कंप्यूटर की सूची में चीन के सुनवे तैहुलाइट (Sunway TaihuLight) और थ्येनहो-2 (Tianhe-2) क्रमशः तीसरे और चौथे स्थान पर रहे। टॉप 500 सुपर कंप्यूटरों में 219 चीन के हैं, जो पहले स्थान पर रहे। वहीं अमेरिका का समिट (Summit) सूची के पहले स्थान पर रहा, लेकिन टॉप 500 सुपर कंप्यूटरों में सिर्फ 116 अमेरिका के हैं। इससे ज़ाहिर है कि व्यवसाय का विकास बढ़ाने और सुपर कंप्यूटर का अध्ययन करने में चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा और स्पष्ट हो चुकी है। इसी स्थिति में अमेरिका ने सुरक्षा की चिंता के बहाने सुपर कंप्यूटर का विकास करने वाली पाँच चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया। हुआवेई के 5-जी तकनीक को रोकने की तरह अमेरिका का उद्देश्य है कि चीनी उद्यमों की आपूर्ति श्रृंखला को काटने के ज़रिए चीन की वैज्ञानिक और आर्थिक क्षमता कम की जाएगी।

एक हफ्ते बाद चीन और अमेरिका के शीर्ष नेता जापान के ओसाका में आयोजित होने वाले जी-20 के शिखर सम्मेलन में फिर से मुलाकात करेंगे। इस मौके पर अमेरिका यह कार्रवाई करके चीन पर दबाव डालकर आर्थिक और व्यापारिक वार्ता में और ज्यादा पलड़े प्राप्त करना चाहता है।

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