टिप्पणी:विनिमय दर के माध्यम से दूसरे पर दबाव डालना उचित नहीं

2019-08-07 20:08:00

अमेरिका ने हाल ही में चीन को “विनिमय दर में हेरफेर देश” के रूप में सूचीबद्ध किया और उसने ऐसा करने से अपने के“विनिमय दर में हेरफेर देश”तय करने वाले मानक का उल्लंघन भी किया है। इस तरह विश्व के अर्थतंत्र को और अधिक खतरा पैदा किया जाएगा और अमेरिका की कार्रवाई बिल्कुल हानिकारक है।

अमेरिका ने इतिहास में अनेक बार विनिमय दर के माध्यम से दूसरे देशों के खिलाफ कदम उठाया है। सन 1980 के दशक में जब जापान का विनिर्माण उद्योग का जोरों पर विकास किया जा रहा था और इससे अमेरिका का व्यापारिक घाटा निरंतर बढ़ रहा था, तब अमेरिका ने विनिमय दर के औजार का प्रयोग कर अपने व्यापारिक असंतुलन को दूर करने का प्रयास किया। सन 1985 के सितंबर में अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस और ब्रिटेन ने समझौता संपन्न कर अमेरिकी डॉलर की गिरावट को बढ़ाया जिससे जापान में बीस सालों के लिए चली आर्थिक मंदी उत्पन्न हुई।

सन 1980 से 1990 के दशक में अमेरिका ने दक्षिणी कोरिया आदि देशों से विनिमय दर लचीलेपन को बढ़ाने, पूंजी नियंत्रण को आराम देने और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इनकी मुद्रा को बढ़ाने की मांग की। इनके अलावा जर्मनी, इटली, जापान और सिंगापुर आदि देशों को भी विनिमय दर में हेरफेर करने वाले देशों की सूची में शामिल कराया गया था।

विश्व व्यापार संगठन की सदस्यता प्राप्त होने के बाद से चीन को बार-बार विनिमय दर के सवाल पर अमेरिका की ओर से प्रहार किया गया है। अमेरिका ने भी अनेक बार चीन को अपने मुद्रा के मूल्य को बढ़ाने के लिए जबरन किया। सन 1994 में चीन ने आरएमबी विनिमय दर तय करने का नया उपाय लागू किया और इससे आरएमबी का बाजारीकरण स्तर बहुत उन्नत किया गया है। ट्रम्प सरकार के सत्ता पर आने के बाद अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने अपनी पाँच रिपोर्टों में चीन के विनिमय दर पर सवाल नहीं छेड़ा। लेकिन इधर के समय अमेरिकी सरकार ने एकतरफावादी नीति लागू कर चीन के साथ व्यापार घर्षण शुरू किया। बाजार में व्यापार दबाव के कारण आरएमबी की विनिमय दर में सामान्य हेरफेर होने लगा। अमेरिका में कुछ व्यक्तियों को इस मौके को पकड़कर चीन को “विनिमय दर में हेरफेर देश”का नाम दिया। इससे चीन और अमेरिका के बीच आर्थिक व व्यापारिक संबंधों के विकास में नयी बाधा रखी गयी है। अमेरिका के भूतपूर्व वित्त मंत्री लॉरेंस समर्स ने 6 अगस्त को वाशिंग्टन पोस्ट में लेख जारी कर कहा कि चीन को “विनिमय दर में हेरफेर देश”के रूप में माना जाना उचित नहीं है और इससे अमेरिकी सरकार की प्रतिष्ठा और अर्थतंत्र को क्षति पहुंचायी जाएगी।

जिम्मेदारना अर्थतंत्र होने के नाते चीन ने अनेक बार यह ऐलान किया कि चीन जानबूझकर अपनी मुद्रा की गिरावट संपन्न नहीं करेगा और मुद्रा के विनिमय दर के औजार से व्यापार घर्षण नहीं करेगा। चीन बाजार की मांग पर आधारित, एक टोकरी मुद्राओं की तुलना में प्रबंधित अस्थायी विनिमय दर प्रणाली लागू करना जारी रखेगा। इसी दृष्टि से देखें तो अमेरिका द्वारा विनिमय दर के सवाल पर चीन को दबाव डाला जाना उचित नहीं है और वह जरूर ही विफल रहेगा।

( हूमिन )

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