टिप्पणी:व्यावहारिक सहयोग से नए युग में चीन-रूस संबंधों में नयी शक्ति

2019-09-18 20:08:00

चीन और रूस दोनों संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देश हैं और एक दूसरे के सबसे बड़े पड़ोसी भी हैं। उन के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध कायम करने से विश्व शांति और समृद्धि की रक्षा करने के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में एकतरफावाद और संरक्षणवाद के उभरने से विश्व अर्थतंत्र में तनाव और अनिश्चितता पैदा हुई है। संयुक्त राष्ट्र संघ पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। चीन और रूस दोनों आर्थिक वैश्विकरण तथा स्वतंत्र व्यापार का समर्थन करते हैं और संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकार तथा बहुपक्षवाद की रक्षा करते हैं। यात्रा के दौरान चीन और रूस के नेताओं ने यह दोहराया कि वे विश्व व्यापार संगठन के नियम पर आधारित बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के मूल्य तथा बुनियादी सिद्धांत पर डटे रहेंगे, बेल्ट एंड रोड पहल को यूरोप-एशिया आर्थिक संघ के साथ जोड़ेंगे, जी20, ब्रिक्स, शांघाई सहयोग संघ, चीन-रूस-भारत तथा एपेक आदि अंतर्राष्ट्रीय संरचनाओं के माध्यम से बहुपक्षीय व्यापार का समर्थन करेंगे और एकतरफावाद तथा संरक्षणवाद का विरोध करेंगे।

70 साल बाद चीन और रूस के बीच संबंध एक नयी शुरुआत पर आ पहुंचे हैं। चीन और रूस आपस में रणनीतिक विश्वास को मजबूत करेंगे, पारस्परिक हितों के एकीकरण को गहराएंगे और संयुक्त राष्ट्र पर केंद्रित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था की रक्षा करेंगे। इससे दोनों देश अपने-अपने आर्थिक विकास करने के साथ-साथ समान भाग्य वाले समुदाय की स्थापना तथा विश्व की शांति को बनाये रखने के लिए योगदान पेश करेंगे।

( हूमिन )

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