(इंटरव्यू) शैक्षिक सहयोग से भारत-चीन संबंध मजबूत होगा : कुलपति विद्युत चक्रवर्ती

2019-06-29 15:04:00

भारत के पश्चिम बंगाल के शहर शान्ति निकेतन में बसा विश्वभारती विश्वविद्यालय भारत के केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना साल 1921 में रवींद्र नाथ टैगोर ने की थी। इसकी स्थापना के पीछे रवींद्र नाथ टैगोर की सोच ऐसे शिक्षण संस्थान बनाने की थी, जहां पूरी दुनिया की शिक्षा मिल सके। साथ ही, साल 1937 में भारत और चीन को एक सूत्र में बांधने के लिए चीना भवन की स्थापना की गई।

पिछले सप्ताह विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विद्युत चक्रवर्ती चीन आए जहां उन्होंने चीन के अनेक विश्वविद्यालयों का दौरा किया। कुलपति प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने चाइना रेडियो इंटरनेशनल (सीआरआई) के साथ ख़ास बातचीत में कहा कि उन्होंने सबसे पहले दक्षिण चीन के युन्नान प्रांत में स्थित दो विश्वविद्यालयों (युन्नान विश्वविद्यालय और युन्नान मिंजू विश्वविद्यालय) का दौरा किया, और दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षिक सहयोग और आदान-प्रदान को और अधिक मजबूत करने पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि विश्वभारती विश्वविद्यालय का युन्नान की दोनों विश्वविद्यालयों के साथ पहले से ही सहयोग चल रहा है, और दोनों विश्वविद्यालयों के शिक्षक, छात्र एक दूसरे विश्वविद्यालयों का दौरा करते हैं।

प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने आगे बातचीत में कहा कि उनके विश्वविद्यालय का पेइचिंग विश्वविद्यालय के साथ भी सहयोग है, लेकिन अभी शांगहाई के फुतान विश्वविद्यालय के साथ कोई सहयोग नहीं है, जिसके लिए उन्होंने फुतान विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने अनेक विशेषज्ञों, विद्वानों से भी मुलाकात की।

कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि उनकी फुतान विश्वविद्यालय के कुलपति के साथ बैठक सकारात्मक रही और उम्मीद जतायी कि बहुत जल्द ही दोनों विश्वविद्यालय भविष्य में संस्कृति, भाषा और प्रबंधन में अपने आदान-प्रदान और सहयोग को गहरा करेंगे और संयुक्त अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के रूप में अपने सहयोग को बढ़ावा देंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि इस बार उन्होंने सामाजिक विज्ञान की चीनी अकादमी के साथ भी शैक्षिक सहयोग करने की बातचीत की, जो सकारात्मक रही।

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