(इंटरव्यू) शैक्षिक सहयोग से भारत-चीन संबंध मजबूत होगा : कुलपति विद्युत चक्रवर्ती

2019-06-29 15:04:00

प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने सीआरआई के साथ बातचीत में यह भी कहा कि विश्वभारती विश्वविद्यालय में कई विभाग जैसे संगीत विभाग, कला और शिल्प विभाग, दर्शन विभाग, और आर्थिक राजनीति विभाग बहुत मजबूत हैं और दुनिया में इन विभागों का कोई सानी नहीं हैं। इन विभागों में जाने-माने विशेषज्ञ हैं। अभी विश्वभारती विश्वविद्यालय और चीनी विश्वविद्यालयों के बीच इन विभागों में सहयोग करने की बातचीत चल रही है।

कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने यह भी कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और आदान-प्रदान करने से चीन और भारत दोनों देशों का मंगल होगा। प्रो. चक्रवर्ती की कामना है कि चीन और भारत की महान संस्कृति एक दूसरे के करीब आए, और दुनिया को दिखा दें कि चीन और भारत के पास जो संसाधन हैं, वह कम नहीं है।

रविंद्रनाथ टैगोर ने साल 1937 में चीन के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने के लिए चीना भवन की स्थापना की। अब यह भवन विश्वविद्यालय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। चीना भवन के बारे में बात करते हुए विश्वभारती विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि न जाने चीना भवन का दायरा इतना छोटा कैसे हो गया। अब इसे केवल चीनी भाषा सीखने का ही केंद्र समझा जाने लगा है जबकि इस भवन की स्थापना चीन का समाज, राजनीति, इतिहास, संस्कृति, दर्शन आदि जानने और समझने के लिए किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि चीना भवन ही विश्वभारती विश्वविद्यालय है, जबकि यह गलत है। विश्वभारती विश्वविद्यालय में और भी अनेक मजबूत विभाग हैं।

प्रो. विद्युत चक्रवर्ती ने आगे कहा कि पिछले 5 दशक पहले देखें तो चीना भवन का फोकस चीनी भाषा में नहीं था, उसका फोकस चीन के इतिहास, समाज, संस्कृति, राजनीति आदि में था। लेकिन अब यह एक चीनी भाषा का स्कूल बन गया है। वे इस नजरिया में परिवर्तन ला रहे हैं और चीना भवन के दायरे को विस्तृत कर रहे हैं। न केवल चीनी भाषा का अध्ययन होगा, बल्कि चीन से संबंधित विभिन्न आयामों को पढ़ा और समझा जाएगा। इससे इस भवन को नई दिशा मिलेगी।

(अखिल पाराशर)

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