रेगोंग में थांगका कला का विकास और गरीबी उन्मूलन

2017-08-29 11:28:04

रेगोंग में थांगका कला का विकास और गरीबी उन्मूलन

थांगका चित्र कला चीन की तिब्बती जातीय संस्कृति का सार माना जाता है और थांगका तिब्बती जातीय संस्कृति की जानकारी प्राप्त करने की कुंजी भी है । छींगहाई प्रांत के ह्वांगनान तिब्बती स्वायत्त प्रिफेक्चर में केंद्र सरकार की मदद से थांगका चित्र कला के विकास से गरीबी उन्मूलन करवाने की कोशिश की जा रही है ।

ह्वांगनान प्रिफेक्चर के तहत थूंगरेन काउटी में तिब्बती और दूसरी जातियां साथ-साथ रहती हैं । यहां थांगका चित्र कला का जन्म स्थल माना जाता है और वह तिब्बती बौद्ध धर्म, महाकाव्य और तिब्बती ऐतिहासिक संस्कृति से घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है । इस क्षेत्र और आसपास क्षेत्रों के साथ-साथ मिलकर तिब्बती संस्कृति का रेगोंग कला कहलाता है । इसमें थूंगरेन काउटी की थांगका चित्र कला विश्व भर सुप्रसिद्ध है ।

थूंगरेन काउटी की एक लाख जनसंख्या में 20 हजार थांगका चित्रकार शामिल हैं । यहां स्थापित रेगोंग जातीय संस्कृति भवन में हर रोज़ सौ से अधिक छात्र अध्यापकों से थांगका कला का अध्ययन करते रहे हैं । 23 वर्षीय तिब्बती लड़का दानजंग सांगतींग ने रेगोंग जातीय संस्कृति भवन में चार सालों के लिए थांगका चित्र कला का अध्ययन किया है । यहां स्नातक होने के बाद वे अपने थांगका चित्रों के साथ राजधानी पेइचिंग और दूसरे शहरों में प्रदर्शनी में भाग लेंगे । उन्हों ने कहा,“प्राइमरी स्कूल से स्नातक होने के बाद मैं ने छोड़ दिया । इस के बाद मुझे थांगका चित्र कला पसंद होने लगा । पहले चित्रकारी आम तौर पर मिट्टी के पिगमेंट का इस्तेमाल करते थे, पर आज हम ने खनिज पदार्थों से बने पिगमेंट का चयन किया है । थांगका के कई किस्म भी हैं जैसे काला, स्वर्ण, लाल या रंगीन वाला । मुझे रंगीन वाला पसंद है । मेरा यहां का खर्च सब अध्यापक और स्कूल की तरफ से आता है । खान पान और पिगमेंट आदि सब स्कूल के खर्च में शामिल हैं । वर्ष 2015 में मैं ने छींगहाई प्रांत के जातीय विश्वविद्यालय के थांगका गैर-भौतिक विरासत प्रशिक्षण केंद्र में अध्ययन किया । एक महीने के अध्ययन में अनेक तिब्बती अध्यापकों ने हमें थांगका चित्र कला के आधार और अनुभव आदि का कोर्स सिखाया और मैं ने बहुत से सीख लिया ।”

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