कांजी तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र में लकड़ी की खास वास्तुकला

2017-09-20 22:01:01

दक्षिणी पश्चिम चीन में सछ्वान प्रांत के कांजी तिब्बती स्वायत्त क्षेत्र के तावू काउंटी में अधिकतर तिब्बती जाति के ही लोग रहते हैं। तिब्बती घरों में लकड़ियों का बड़े ही भव्यता से उपयोग किया जाता है। छतों को लकड़ी के बीम और स्तंभों से सहारा दिया जाता है। पारंपरिक तिब्बती घरों में फर्श, छत और फर्नीचर सब लकड़ी के ही होते हैं। उन लकड़ियों पर बेहद सुंदर कालाकारी और नक्काशी की जाती है। उन पर ड्रेगन, शेर, घोड़ा, पक्षी, देवी-देवता आदि चित्र उखेरे जाते हैं। जिस मकान का दौरा किया, वहां छोटी-छोटी लकड़ियों के टुकड़ों से नक्काशी व चित्र बनाई गई थीं। बताया गया कि इस तरह की नक्काशी खास तावू काउंटी में रहने वाले तिब्बती लोगों की विशेषता है।

तिब्बती लोग अपने घरों में चित्रकारी को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं। उनके अनुसार जब तक उनके घर के अंदर और बाहर चित्रकारी नहीं होती है, तब तक वे अपने घर को पूरा नहीं मानते है। बाहरी चित्रकला आमतौर पर आंतरिक सजावट की तुलना में बहुत सरल होती है। तिब्बती लोग चित्रकारी में लाल, हरा और सुनहरे रंग का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं।

हर 3-4 सालों में मकानों की मरम्मत की जाती है, उनमें फिर रंग भरे जाते हैं। मकानों की मरम्मत में एक बार में औसतन 20 से 30 हजार युवान का खर्चा आता है। मकानों का रखरखाव भी बेहतरीन ढंग से किया जाता है। चूंकि पूरा घर लकड़ी का बना होता है तो आग लगने के खतरे से बचने के लिए हर कोने में आग बुझाने वाले यंत्र रखे होते हैं।

(अखिल पाराशर)

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