शिगाज़े के छेवा कस्बे में जातीय एकता का आदर्श

2018-03-19 15:32:06

शिगाज़े के छेवा कस्बे में जातीय एकता का आदर्श

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शिगाज़े शहर की रेनबूंग काउंटी के छेवा कस्बे में तिब्बती, हान, ह्वेई, ई और सारा आदि अनेक जातियां साथ-साथ रहती हैं। विभिन्न जातियों के लोग स्नेहपूर्वक रहकर काम और व्यवसाय करते हैं।

स्थानीय सरकार जातीय एकता को बहुत महत्व देती रहती है। सरकार के कर्मचारियों ने आर्थिक विकास के दौरान जातीय एकता को प्राथमिकता दे दी है और जातीय एकता के प्रसारण कार्यों पर जोर लगाया है। छेवा कस्बे के पार्टी सचिव ल्यू च्वन ह्वा ने कहा,“हम पार्टी की नीतियों के प्रसारण को जोर लगाते रहे हैं। महासचिव शी चिनफिंग ने जातीय एकता को बढ़ाने और सुन्दर तिब्बत का निर्माण करने का नारा पेश किया, हम ने अपने प्रसारण कार्यों में लोगों को इस नीति का महत्व महसूस करा दिया है। निवासियों को अपने अनुभव से यह पता लगा है कि जातीय एकता बनाये रखने से उन के हित में होता है।”

छेवा कस्बे के कुल 43 गांव हैं जहां कुल 4297 व्यक्ति रहते हैं। इन में विभिन्न जातीय लोगों के बीच विवाह होने की बात हुई है। ऐसे परिवारों की संख्या 37 तक जा पहुंची है जो तमाम गांवविसायों में पाँच प्रतिशत रही है। भिन्न भिन्न जातीय वाले परिवारों में पति और पत्नी एक दूसरे को प्यार करते हैं और उन का जीवन भी बहुत खुश है। वर्ष 2002 में तिब्बती जातीय लड़की यांगचेन ने कार्य स्थल पर सछ्वान प्रांत से गये हान जातीय लड़के शू वेनच्वन के साथ प्यार करना शुरू किया और दोनों की बहुत जल्दी शादी हुई। वर्ष 2007 में इस दंपत्ति अपने बच्चे के साथ छेवा कस्बे के पूना गांव में नव निर्मित निवास में स्थानांतरित हुआ। आज उन का बेटा मिडिल स्कूल में दाखिल हो गया है, पत्ति शू वेनच्वन बाहर के क्षेत्र में नौकरी करते हैं, पत्नी गांव में तीन सब्जी ग्रीनहाउस का प्रबंधन कर रही है, इस परिवार की आय में काफी वृद्धि हुई है। यांगचेन ने कहा,“वर्ष 2007 में सरकार ने हमें नये मकान का वितरण किया। इस के बाद मैं ने गांव में तीन सब्जी ग्रीनहाउस ले लिये। मेरा पत्ति बाहर नौकरी करते हैं, मैं घर में सब्जियों का रोपण करती हूं। आज हमारा जीवन काफी खुशहाल है। हमारा राजस्व एक साल के लिए साठ सत्तर हजार युवान तक रहता है।”

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