तिब्बत के शाननान शहर में वृक्षरोपण में संलग्न "पेड़ बाबू"

2018-05-15 09:02:02

तिब्बत के शाननान शहर में वृक्षरोपण में संलग्न "पेड़ बाबू"

तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के शाननान शहर की चानांग काउंटी यालूजांगबू नदी के मध्य भाग के तट पर स्थित है। इस क्षेत्र में ज्यादा रेतीली हवा चलती है और कम बरसात होती है। इसलिए इस क्षेत्र में वृक्षरोपण लगाने का विशेष महत्व प्राप्त है। चानांग काउंटी में वर्षों के लिए वृक्षरोपण में संलग्न श्री पैनच्यू को "पेड़ बाबू" का नाम भी अर्पित किया गया। लोगों का कहना है कि बाबू पैनच्यू वर्षों के लिए वृक्ष रोपण लगाने में संलग्न होते रहे और उनके द्वारा लगाये गये पेड़ों की जीवित रहने की दर अधिक है। इस का कारण है कि पैनच्यू ने पेड़ लगाने में अपनी गहरी भावना डाली है।

59 वर्षीय पैनच्यू शाननान शहर की चानांग काउंटी के जूंगत्वेई गांव में रहते हैं। वर्ष 2005 में पैनच्यू को नेशनल वृक्षारोपण मेडल अर्पित किया गया, और दूसरे वर्ष उन्हों ने राष्ट्रीय वृक्षारोपण आदर्श का गौरव भी जीत लिया। अपनी कहानी सुनाते हुए पैनच्यू ने कहा,“जब मैं 17 वर्ष का था, तो मैं ने पहाड़ों में भेड़ चराई करना शुरू किया। कभी कभार मैं ने पहाड़ों में कुछ छोटे पेड़ों का रोपण किया। कई साल बाद ये पेड़ बड़े हो गये। और मैं पेड़ों के नीचे के छाये में बैठकर चाय बना सकता था। पतझड़ के दिनों में मेरे भेड़ इन पेड़ों के पत्ते भी खा सकते थे। तब मुझे लगा था कि पेड़ लगाने का बहुत लाभ था। इस के बाद मैं ने वृक्षारोपण करना शुरू किया।”

वर्ष 1990 में शाननान शहर के वानिकी ब्यूरो ने यालूजांगबू नदी के तटों पर वृक्षारोपण की परियोजनाएं चलायी। पैनच्यू ने भी इस परियोजना में भाग लिया। उन्हों ने 12 व्यक्तियों का एक दल लेकर पेड़ लगाने, कुआँ खोदने और जंगल में वन संरक्षण घर का निर्माण करने आदि का काम भी कर लिया। वर्ष 1991 में शाननान शहर के वानिकी ब्यूरो ने पैनच्यू को पाँच हैक्टर विशाल सुनसान जमीन सौंप दिया। जहां पर पैनच्यू ने एक नर्सरी स्थापित किया। दूसरे वर्ष में उन्हों ने एक और विशाल नर्सरी का निर्माण किया। वर्ष 2004 में पैनच्यू ने अपने जन्मस्थल में पंद्रह हैक्टर विशाल सुनसान जमीन को अनुबंधित तौर पर ले लिया। उन्हों ने गांव की शासन कमेटी के साथ 50 सालों के ठेके पर हस्ताक्षर किये। पैनच्यू ने वानिकी ब्यूरो की छह लाख युवान की सहायता से इस क्षेत्र में तीन ग्रीन हाउस निर्मित किये और पेड़-पौधों का रोपण करना शुरू किया। लेकिन सुनसान जमीन पर पेड़ लगाने में बहुत सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पैनच्यू ने कहा,“उस समय मुझे बिजली का अभाव पड़ने की समस्या थी। हम ने कुआँ खोदने में सफल किया, पर बिजली की आपूर्ति न होने से पानी खींचना मुश्किल था। इसतरह मुझे ट्रैक्टर चलाकर नदी में से पानी वापस लाना पड़ता था।”

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