तिब्बती संस्कृति का विश्वकोश---थांगका चित्र कला का विकास

2018-05-21 15:35:05

थांगका तिब्बती संस्कृति में विशेषता प्राप्त कलात्मक रचना है जिसमें धर्म, कला और इतिहास सभी तत्व शामिल हैं। सछ्वान प्रांत स्थित गैनत्सी तिब्बती स्वायत्त स्टेट की लूहो काउंटी के नामाखाचे संप्रदाय को थांगका कला के विकास में विशेष स्थान प्राप्त है।

लूहो काउंटी के थांगका कलाकारों ने वर्ष 2012 में जातीय हस्तशिल्प कला प्रशिक्षण आधार स्थापित किया जहां नामाखाचे संप्रदाय के थांगका कलाकारों का प्रशिक्षण किया जाता है। थांगका कला का विकास करते समय स्थानीय लोगों के जीवन स्तर को भी बहुत उन्नत किया गया है। स्थानीय सरकार ने थांगका कला केन्द्रों को ज़ोरदार समर्थन दिया है और इनकी कलात्मक रचनाएं अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में भी बेची गयी हैं। साथ ही थांगका कला प्रशिक्षण केंद्रों में बहुत से युवकों ने अपना स्वप्न साकार किया है। क्योंकि प्रशिक्षण केंद्र में कलाकारों को जीवन के प्रति चिन्ता करने की जरूरत नहीं है और वे शांत होकर जीजान से कलात्मक काम कर सकते हैं।

गैनत्सी तिब्बती स्वायत्त स्टेट की लूहो काउंटी के मशहूर थांगका कलाकार यूंगजू ने कहा,“थांगका चित्र को तिब्बती जातीय संस्कृति में सबसे शानदार खजाने में से एक माना जाता है। इसमें तिब्बती संस्कृति का स्रोत और इतिहास का प्रतीक होता है।”

थांगका तिब्बत की विशेष चित्र कला मानी जाती है । इसे तिब्बती संस्कृति का विश्वकोश और पारंपरिक संस्कृति व कला का मूल्यवान गैर-भौतिक विरासत बताया जाता है । सरकार ने थांगका, तिब्बती ओपेरा और गेसार महाकाव्य आदि पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण में भारी निवेश लगाया है । थांगका चित्र कला में तिब्बती समाज के सभी पहलुओं का वर्णन किया जाता है । थांगका अधिकाधिक तौर पर लोकप्रिय होने के साथ-साथ बहुत से पर्यटक अपनी यात्रा के दौरान कुछ थांगका खरीदकर वापस लौटने लगे हैं ।

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