तिब्बती चिकित्सा पद्धति का इतिहास और विकास

2018-08-15 16:02:02

तिब्बती चिकित्सा पद्धति का लम्बा इतिहास है और वह तिब्बती संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक भी माना जाता है।

प्राचीन काल में ही तिब्बती पठार पर रहने वाले लोगों ने अपने शरीरिक बीमारों का उपचार करने में कुछ जड़ी बूटी और खनिज पदार्थों का प्रयोग शुरू किया था। ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी में ही, तिब्बतियों को यह मालूम था कि जहरीली चीज़ों में दवा ही मौजूद था। 17 वीं शताब्दी में पांचवें दलाई लामा ने तिब्बती चिकित्सा के विकास को बहुत महत्व दिया। उन्हों ने तत्कालीन चित्रकारों को रंगीन चिकित्सीय थांगका चित्र रचित करवाया। जिसमें तिब्बती चिकित्सीय विचारधारा व उपचार कौशल का कलात्मक तौर पर वर्णन किया गया था।

जनवादी रुपांतर करने के बाद सरकार ने तिब्बती पारंपरिक चिकित्सा के विकास को महत्व दिया। इधर वर्षों के लगातार विकास से तिब्बती चिकित्सा की शिक्षा व्यवस्था में व्यावसायिक हाईस्कूल से पीएचडी तक सभी डिग्री शामिल हो चुकी हैं। तिब्बती मेडिकल अकादमी और छींगहाई विश्वविद्यालय के तिब्बती मेडिकल कॉलेज में तिब्बती चिकित्सा के पीएचडी छात्र पढ़ रहे हैं। सिचुआन प्रांत और गैनसू प्रांत के पारंपरिक चीनी चिकित्सा विश्वविद्यालयों में भी तिब्बती चिकित्सा क्लास रखे हुए हैं। आज पूरे देश में पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा के 94 अस्पताल स्थापित हो गये हैं और तिब्बती स्वायत्त प्रदेश और सिचुआन प्रांत के तिब्बती बहुल क्षेत्र में काउंटी स्तरीय तिब्बती चिकित्सालय भी रखे हुए हैं। तिब्बती स्वायत्त प्रदेश और छींगहाई प्रांत के तिब्बती चिकित्सा अस्पताल को राष्ट्र स्तरीय अस्पताल माना जा रहा है। केंद्र सरकार की मदद से पूर्ण आधुनिक तिब्बती चिकित्सा व्यवस्था और सिद्धांत प्रणाली स्थापित की गयी हैं।

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