प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन समाप्त

2018-10-01 16:03:00

प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन

वर्ष 2018 के 21 सितंबर को प्रथम राष्ट्रीय युवा तिब्बती अध्ययन सम्मेलन चीन की राजधानी पेइचिंग में समाप्त हुआ। देश के विभिन्न क्षेत्रों, उनमें थाइवान और हांगकांग भी शामिल हैं, के युवा विद्वानों ने सम्मेलन में अपने अपने शोध परिणाम और विचार का परिचय दिया।

चीन के तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के तहत युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग के प्रधान लाशांका ने कहा कि सम्मेलन में भाग लिये जो विद्वान हैं, वे सब 30-40 साल के बीच में युवा हैं। पर उन का शोध का काम मजबूत है। ये विद्वान हांगकांग व थाइवान समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों के कालेज़ों, अनुसंधानशालों से आये हैं। और उन का अनुसंधान राजनीति, अर्थव्यवस्था, कानून, समाज, जन जीवन, धर्म, इतिहास, भाषा, कला और चिकित्सा आदि सभी पहलुओं से संबंधित हैं।

आज चीन में तिब्बत का अनुसंधान करने के कुछ युवा विद्वानों ने तीन चार भाषाओं में महारत हासिल की है, जो तिब्बत के अनुसंधान करने में बहुत मददगार है। सम्मेलन में अनेक विद्वानों ने तिब्बती भाषा में ही रिपोर्ट प्रस्तुत की है। युवा तिब्बत अनुसंधान विभाग की महासचिव चांग ली वेन ने कहा कि सम्मेलन के आयोजन से चीन में युवा अनुसंधानकर्ताओं के कार्यों का मूल्यांकन किया गया है। इस के बाद सभी युवा विद्वानों के थीसिस को तिब्बती अध्ययन सेमिनार के संग्रह में शामिल कराया जाएगा, और सम्मेलन में जारी किये गये थीसिस को अगले साल के राष्ट्रीय तिब्बती अध्ययन सम्मेलन को भी प्रस्तुत किया जाएगा।

चीन के तिब्बती विज्ञान अनुसंधान केंद्र के महासचिव झेंग त्वेई ने कहा कि युवा अनुसंधानकर्ताओं को तिब्बत और देश के विकास से संबंधित समस्याओं का समाधान करने के लिए पूरी कोशिश करनी चाहिये। चीनी सोशल अकादमी के आधुनिक इतिहास पर शोधकर्ता शू ची मीन ने कहा कि बीते साठ सालों में केंद्र ने तिब्बत के विकास के लिए भारी सहायता प्रदान की है, जिससे तिब्बत के प्रति भीतरी इलाकों की जनता की विशेष भावना तथा तिब्बत से संबंधित कार्यों का महत्व जाहिर हो गया है। केंद्र ने दीर्घकाल तक तिब्बत में पार्टनर सहायता की नीति अपनायी है, जो तिब्बत के आर्थिक व सामाजिक विकास के लिए कारगर साबित है। कुछ युवा विद्वानों ने बताया कि तिब्बत में सामाजिक परिवर्तन आर्थिक विकास से आधारित होना चाहिये, साथ ही तिब्बत में आर्थिक विकास इस क्षेत्र के इतिहास, समाज तथा संस्कृति के आधार पर किया जाना चाहिये। तिब्बत की संस्कृति बौद्ध धर्म से जुड़ी हुई है। तिब्बती समाज का भावी विकास भी इस पृष्ठभूमि से अलग नहीं हो सकेगा।

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