तिब्बत में पर्यटन का जोरों पर विकास

2018-10-08 15:49:01

हर साल 9 से 15 सितंबर तक तिब्बती लोगों का“स्नान त्यौहार”कहलाता है। तब तिब्बती लोग, बूढ़े या युवक, सब नदियों में स्नान करने जाते रहे हैं। तिब्बती परंपरा के मुताबिक“स्नान त्यौहार”मनाने से न सिर्फ शरीर की सफाई होती है, बल्कि रोगों व आपदाओं की सफाई भी कर सकते हैं। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के अनुसार प्राचीन काल से ही तिब्बत में लोग हर पाँच दिन के लिए स्नान करते थे। और ऐसी आदत अपनाने से शरीर में से बीमारियों से छुटकारा पाएगा। और नदियों में स्नान करने की आदत तिब्बत में दूसरी आदत यानी औषधीय स्नान से भी जुड़ा हुआ है। औषधीय स्नान को भी अपनी सैद्धांतिक प्रणाली और ऑपरेटिंग नियम प्राप्त है।

दूसरी तरफ तिब्बत में तरह तरह के जंगली पौधों से लोगों के लिए स्वस्थ भोजन तैयार है। तिब्बत के न्यिंग-ची क्षेत्र में हर साल माट्सूटेक भोजन त्योहार की गतिविधि भी चलायी जाती है। माट्सूटेक नामक मशरूम आम तौर पर पाइन पेड़ के नीचे उगने वाला है। हर साल की गतिविधियों में हजारों पर्यटकों को आकर्षित किया जाता है।

न्यिंग-ची क्षेत्र में एक छोटा नगर लुलांग आज भी पर्यटकों को आकर्षित करने का एक तीर्थस्थल बना है। वर्ष 2016 से लुलांग नगर में दस लाख से अधिक देशी विदेशी पर्यटकों का सत्कार किया गया है।

तिब्बत में पर्यटन उद्योग के विकास के दौरान प्राकृतिक वातावरण के संरक्षण को हमेशा से जोर लगाया गया है। उदाहरण के लिए तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के नाग्छू प्रीफेक्चर में अभी तक 14 प्राकृतिक संरक्षण क्षेत्र स्थापित हो चुके हैं और संरक्षण से जुड़े उपकरणों के निर्माण में कुल कई अरब युआन की पूंजी डाली गयी है। नाग्छू की सरकार ने पेयजल स्रोतों की सुरक्षा को सुदृढ़ किया है और जल स्रोत में कई पर्यावरण संरक्षण परियोजनाएं लागू की हैं। नाग्छू क्षेत्र में शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोत संरक्षण कार्यों को मजबूत किया गया है। स्थानीय सरकार का मानना है कि तिब्बत में आर्थिक निर्माण करते समय वातावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिये। आजकल यह सभी लोगों की आम सहमति बन गयी है। सरकार अपने कार्यों में तिब्बत इस दुनिया में अंतिम शुद्ध भूमि का यथासंभव संरक्षण करने की जिम्मेदारी उठाती रही है।

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