तिब्बत में आपदा राहत कार्य की प्रगति

2018-10-24 16:02:01

हाल ही में तिब्बत स्वायत्त प्रदेश और सिचुआन प्रांत की सीमा पर बहती चिनशा नदी पर गंभीर भूस्खलन होने से भरवां झील पैदा हुई। और इस झील के फटने से नदी के तटों पर रहने वाले लोगों को गंभीर खतरा पैदा होता है। आंकड़े बताते हैं कि आपदा से ग्रस्त हुए डेढ़ लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया गया है। संबंधित आपदा राहत कार्य सुभीते से चलाया जा रहा है।

तिब्बत के नागरिक मामले विभाग के सामाजिक कल्याण कार्यालय के प्रधान के अनुसार न्यिंग-ची शहर में अभी तक मिलिन काउंटी और मेडोग काउंटी में आपदा ग्रस्त लोगों के पुनर्वास के लिए 25 अस्थायी केंद्र स्थापित किये गये हैं। स्थानीय सरकार ने आपदा ग्रस्त लोगों के लिए पेयजल, खाद्य पदार्थ और तंबू आदि की खूब आपूर्ति की गयी है। इन के अलावा आपदा ग्रस्त लोगों को सर्दियों में पास करवाने के लिए बहुत से बिस्तर, कपड़े, ईंट चाय और अन्य दैनिक आवश्यकताओं की तैयारी भी की गयी है। सरकारी पदाधिकारी का कहना है कि आपदा ग्रस्त लोगों के रोजाना जीवन की गारंटी के लिए सभी पुनर्वास केंद्रों को सुनिश्चित करना चाहिये। साथ ही आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में उत्पादन की बहाली करने वाले कार्यों पर भी विचार विमर्श किया जा रहा है। विशेषज्ञों ने आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में पुनः डिजाइनिंग करने का काम शुरू किया है ताकि इन क्षेत्रों में रहने वालों को जल्द ही सामान्य जीवन प्राप्त हो सके। सरकार और आपदा राहत विभागों ने तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में आपातकालीन बचाव की व्यवस्था में सुधार लाने तथा व्यापक आपदा राहत क्षमताओं को उन्नत करने पर भी विचार किया है।

विशेषज्ञों के अनुसार चिनशा नदी पर भूस्खलन से पैदा भरवां झील में प्रति सेकंड 1700 क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण संरक्षित किया गया है। इस झील के आसपास रहने वालों के मकानों, सड़कों, पुलों, और कृषि भूमि आदि को बाढ़ से डूबा गया है। अगर झील फटा हुआ हो, तो नदी के नीचले क्षेत्रों में गंभीर आपदा जन्म दिया जाएगा। आपदा राहत कार्यों की गारंटी के लिए स्थानीय सरकार ने देश के जल संसाधन मंत्रालय और मौसम विज्ञान ब्यूरो आदि संस्थानों के साथ साथ लोगों के स्थानांतरण, भूगर्भीय खतरों की जांच-पड़ताल तथा भरवां झील के खतरे पर विचार विनिमय किया और संयुक्त रूप से राहत कार्य योजनाएं तैयार कीं। केंद्र ने भी चिनशा नदी के गंभीर भूस्खलन के प्रति चौथे स्तरीय आपदा राहत प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया। अभी तक भरवां झील में पानी प्राकृतिक तौर पर बाहर निकलने लगा है, जिससे बांध तोड़ने का खतरा कम होने लगा है। इस के बाद सरकार के राहत कार्यों का केंद्र आपदा ग्रस्त लोगों के पुनर्वास पर बदल गया है। केंद्र और तिब्बत की स्थानीय सरकार, सेना और नागरिक आपदा राहत दलों ने आपदा ग्रस्त लोगों को भारी सहायता प्रदान की। सेना ने अपने बचाव दल, चिकित्सा बचाव टीम और हेलीकॉप्टर आदि भी आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में भेजा है। अभी तक आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में कोई हताहत की घटना नहीं हुई।

न्यूज़ व्यापार पर्यटन बाल-महिला स्पेशल विश्व का आईना चीनी भाषा सीखें वीडियो फोटो गैलरी