तिब्बत में जातीय एकता की अच्छी स्थिति बनी हुई है

2018-11-19 15:31:00

तिब्बती पठार पर दीर्घकाल तक एक गीत की आवाज़ गुंज रही है कि सूर्य और चंद्रमा एक मां की बेटियां हैं, हान जाति और तिब्बती जाति भी एक मां की बेटियां ही हैं। उन की मां का नाम है चीनी राष्ट्र। प्राचीन काल से ही तिब्बती पठार एक बहुजातीय क्षेत्र रहता था। पठार पर तिब्बती जाति के अलावा हान, ह्वेई, मेनबा, लोबा और नाशी आदि अनेक जातियां रही हैं। तिब्बती जनता ने मातृभूमि के एकीकरण के लिए अद्भुत योगदान पेश किया है।

पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के आयोजन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की पार्टी कमेटी और सरकार ने जातीय एकता को अत्यंत महत्व दिया। वर्ष 2012 में ल्हासा शहर की सरकार ने कानून बनाकर 17 सितंबर को जातीय एकता और प्रगति दिवस तय किया। यह पहली बार है कि किसी शहर ने जातीय एकता और प्रगति के कार्यों के लिए कानून बनाया है। सितंबर माह में ल्हासा शहर के कम्युनिटी में तिब्बती, हान, ह्वेई, वेईवूर, साला और पाई आदि जातियों के लोगों ने खुशी से समारोह का आयोजन किया। एक दूसरे का समादर करना और समानता से रहना जातीय एकता का आधार है। पार्टी की 18वीं राष्ट्रीय कांग्रेस के बाद तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की जन प्रतिनिधि सभा ने कुल 61 स्थानीय कानूनों का संशोधन या पुष्टि कर विभिन्न जातियों के अधिकारों की गारंटी की है। तिब्बत के नये साल और शॉन डुन त्यौहार को स्वायत्त प्रदेश के वैधानिक त्यौहार के रूप में तय किया। वर्ष 2017 तक तिब्बत स्वायत्त प्रदेश की जन प्रतिनिधि सभा ने कुल 297 स्थानीय कानून बनाकर तिब्बत में जातीय नीति, आर्थिक विकास, सांस्कृतिक शिक्षा, भाषा, चिकित्सा और स्वास्थ्य, सांस्कृतिक अवशेष संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक प्रबंधन आदि पहलुओं में वैधानिक व्यवस्था कायम की है।

देश की जन प्रतिनिधि सभा और राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन में तिब्बती समेत अल्पसंख्यक जातियों का अपना अपना प्रतिनिधि निर्वाचित है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में रहने वाले मेनबा, लोबा और नाशी आदि जातियों को भी अपने अपने जातीय स्वायत्त जिले भी सुरक्षित हैं। पार्टी और सरकार के समर्थन से तिब्बत स्वायत्त प्रदेश में जातीय सांस्कृतिक विरासत और विशिष्ट संस्कृति का संरक्षण, उत्तराधिकार और विकास को बहुत महत्व दिया गया है। पार्टी के महासचिव शी चिनफिंग ने देश के द्वितीय केंद्रीय सिंच्यांग कार्य सम्मेलन में कहा था कि चीन में सभी जातियों को एक दूसरे की समझ करना, एक दूसरे का समादर करना और एक दूसरे से समावेश करना चाहिये। देश में भिन्न भिन्न जातियों के लोगों को अनार के बीज की तरह एकजुट होकर रहना चाहिये। अनार को चीन की पारंपरिक संस्कृति में शुभंकर समझा जाता है। चीनी राष्ट्र में विभिन्न जातियों के लोग भी एक अनार के एक एक बीज के जैसे हैं। अब तिब्बत में विभिन्न जातियों के लोग भी दूसरे वासियों को अपने भाई जैसे समझते हैं। मिसाल के तौर पर तिब्बत के शाननान शहर की गूंगा काउंटी के लांगच्येलीन कस्बे में 298 परिवार रहते हैं। उन में 24 तिब्बती-हान परिवार भी हैं। ऐसे घर में या पत्ती या पत्नी अलग जातियों के होते हैं। पर वे बहुत खुशी से रह रहे हैं। तिब्बती पठार पर जातीय एकता की कहानियां हर दिन पैदा हो रही हैं।

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