तिब्बत में जातीय एकता की अच्छी स्थिति बनी हुई है

2018-11-19 15:31:00

आंकड़े बताते हैं कि अब तिब्बती जन प्रतिनिधि सभा में 70 प्रतिशत भाग अल्पसंख्यक जातीय ही हैं। स्वायत्त प्रदेश के कर्मचारियों में 57 प्रतिशत भाग भी अल्पसंख्यक जातीय हैं। अधिकांश संस्थाएं भी बहुजातीय कर्मचारियों से गठित हैं। मिसाल के तौर पर अख़बार तिब्बती दैनिक में हान, तिब्बती, ली, तूंग, ह्वेई और थूच्या आदि जातियों के संवाददाता साथ साथ काम करते रहे हैं। साथियों ने एक दूसरे की मदद कर बहुत से महत्वपूर्ण प्रसारण मिशन समाप्त किया और अनेक बार राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। जातीय एकता को और अधिक मजबूत करने के लिए स्वायत्त प्रदेश की सरकार ने 42 नये नियम भी बना दिये और जातीय एकता सम्मेलन के आयोजन से जातीय एकता के लिए वातावरण तैयार किया है। उधर बहुत से पूंजीनिवेशकों ने भी भीतरी इलाकों से तिब्बत जाकर विशेष रोपण, पर्यटन और पारंपरिक हस्तशिल्प आदि उद्योगों का विकास किया। उन के प्रयासों से स्थानीय अर्थतंत्र को बढ़ाने के साथ साथ तिब्बती लोगों को गरीबी से छुटकारा पाया है।

जातीय एकता को बढ़ाने वाली गतिविधियों के आयोजन से विभिन्न जातियों के लोगों में मातृभूमि, कम्युनिस्ट पार्टी तथा चीनी विशेषता वाले समाजवाद के प्रति सहमतियों को भी मजबूत किया गया है। तिब्बत में जातीय एकता के सुधार से धार्मिक सद्भाव को भी बढ़ावा मिला है। तिब्बत स्वायत्त प्रदेश के समाजवादी संस्थान के उप प्रधान डॉक्टर रोदान ने जेनेवा के संयुक्त राष्ट्र अधिवेशन में कहा कि आज तिब्बत का आर्थिक निर्माण सुभीते से किया जा रहा है, जन जीवन में निरंतर सुधार आया है, प्राकृतिक वातावरण का अच्छी तरह संरक्षण किया जा रहा है और विभिन्न जातियों के लोग अपने जीवन के प्रति काफी संतुष्ट हैं। रोदान के अनुसार तिब्बत में बौद्ध धर्म के अलावा इस्लाम और कैथोलिक आदि दूसरे धर्म भी चलते हैं। तिब्बत में धार्मिक स्थलों की संख्या 1787 तक जा पहुंची है, भिक्षुओं और भिक्षुणियों की संख्या 46 हजार तक रही है। सभी बौद्धिक गतिविधियों का संरक्षण किया गया है।

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