तिब्बती हस्तशिल्प कला का जी-जान से विकास

2019-04-08 10:32:00

चीन के तिब्ब्त स्वायत्त प्रदेश की राजधानी ल्हासा शहर के उपनगर में स्थित तुंगगा गांव में स्थापित पारंपरिक तिब्बती हस्तशिल्प कंपनी के कुल अठावन कर्मचारियों में से अड़तालीस लोग अपाहिज होते हैं। वे इस कारखाने में कौशल सीखकर अपनी सपना को साकार कर चुके हैं।

इस कारखाने के प्रमुख थेनज़िन नोर्बू सन 1990 के दशक में जन्म हुए तिब्बती युवक है। इस का पोषण अपनी नानी और चाची के द्वारा किया गया था। चाची जी भी एक अपाहिज़ हैं, इसलिए नोर्बू को विकलांग लोगों की जीवन और रोजगार में कठिनाइयों की खूब जानकारी भी प्राप्त है।

नोर्बू जन कल्याण कार्यों पर उत्साही हैं। उन्होंने शाननान क्षेत्र में एक टाउनशिप स्तरीय प्राइमरी स्कूल में नये मकान का निर्माण करने, गरीब छात्रों की मदद करने और नेपाली भूकंप के राहत कार्यों में भाग लिया। उन का ख्याल है कि परोपकारी कार्यों को उद्योग संचालन के साथ किया जाना चाहिए। इसी विचार में उन्हों ने अपनी हस्तशिल्प कंपनी स्थापित की जो विशेष तौर पर तिब्बती शैली वाले टेंट, पर्दे, वेशभूषा और कपड़े आदि हस्तशिल्प वस्तुओं का डिजाइन और उत्पादन करती है। कंपनी में अपाहिज कर्मचारियों का अच्छी तरह प्रशिक्षण किया जाता है। कर्मचारी यहां से पारंपरिक कौशल सीखते हैं और कर्मचारियों के बीच अकसर कौशल प्रतियोगिता चलायी जाती है, प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार मिल सकता है। कंपनी में कार्यरत अपाहिज कर्मचारियों को औसतन ढ़ाई सौ या पैंतालीस सौ युआन मासिक तनख्वाह मिल सकता है। 

कंपनी में काम करने वाली मेटोग छोकी पहले घर में पशुओं का पालन करती थी। कारखाने में काम करने के बाद उन्हें कौशल सीखने का मौका मिला। अब वह कुशलता से सिलाई का काम कर सकती है। अपने सपने को साकार करने में उसे बहुत खुशी हुई। मेटोग ने कहा,“यहां मैं ने सिलाई सीखने की कोशिश की है। यह बहुत खुशी की बात है कि जब पिता जी घर में बीमार हुए, मैंने अपनी तनख्वाह से पिता जी को पैसा भेजा है।”

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