इतिहास का सिंहावलोकन --- तिब्बत की ओर जन मुक्ति सेना का अभियान

2019-08-08 14:01:01

तिब्बत प्राचीन काल से ही चीन का अखंडनीय भाग होता रहा है। सन 1949 में नये चीन की स्थापना के बाद देश के अधिकांश भागों की मुक्ति संपन्न हो चुकी थी। पर तिब्बत केंद्र शासन के बाहर रहा था। चीनी कम्मुनिस्ट पार्टी की केंद्रीय कमेटी और अध्यक्ष माऔ त्से तुंग ने विश्व और देश की स्थितियों का समीक्षा करने के बाद तिब्बत की मुक्ति करने का फैसला कर लिया।

सन 1949 की 4 फरवरी को अध्यक्ष माऔ ने हपेइ प्रांत के शिपाईपो में सोवियत कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय पोलिट ब्यूरो के प्रतिनिधि से भेंट के दौरान कहा कि तिब्बत सवाल का समाधान करना कोई कठिन काम नहीं है। लेकिन इसमें धैर्य की आवश्यकता भी चाहिये। क्योंकि तिब्बत जाने के लिए यातायात की विशेष कठिनाइयां मौजूद हैं और हमें अल्पसंख्यक जाति और उन के धर्म के सवालों पर विचार करना पड़ता है। उसी वर्ष की 6 अगस्त को अध्यक्ष माऔ ने चीनी जन मुक्ति सेना के वरिष्ठ नेता जनरल फंग त ह्वाई के समक्ष एक पत्र में बताया कि पंचन लामा लैनचाओ शहर में आ पहुंचे हैं। इस शहर में सैनिक कार्यवाही करते समय जरूर ही पंचन लामा के संरक्षण पर ध्यान देना चाहिये ताकि तिब्बत सवाल के समाधान की तैयारी की जाए। एक महीने के बाद चीनी जन मुक्ति सेना के जनरल कमांडर जू त ने चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन में दावा दिया कि चीनी राष्ट्र के पुनरेकीकरण में तिब्बत की मुक्ति होना अनिवार्य है।

सन 1949 की 1 अक्तूबर को चीन लोक गणराज्य की स्थापना घोषित की गयी। चीनी जन मुक्ति सेना के कमान ने सभी सैनिकों को आदेश दिया कि देश में सभी क्षेत्रों की मुक्ति की जाएगी। 13 अक्तूबर को अध्यक्ष माऔ ने तिब्बत की ओर अभियान करने वाले सैनिकों का विन्यास किया। इससे पहले चीन के उत्तर पश्चिमी भाग के छींगहाई और शिनच्यांग आदि प्रदेशों को मुक्त कराया गया था। इसलिए अध्यक्ष माऔ ने उत्तर पश्चिमी दिशा से तिब्बत की ओर अभियान करने का फैसला लिया। लेकिन यातायात की स्थितियां अत्यंत मुश्किल थीं। उत्तर पश्चिम से तिब्बत की ओर मार्चिंग करने के लिए कम से कम दो सालों की तैयारियां करनी पड़ती थीं। संबंधित रिपोर्ट पढ़ने के बाद केंद्रीय कमेटी और अध्यक्ष माऔ ने तिब्बत की मुक्ति करने का मिशन दक्षिण पश्चिमी भाग में तैनात मुक्ति सेना को सौंप दिया। उन्होंने स्थानीय नेताओं के समक्ष समर्पित अपने एक पत्र में कहा कि तिब्बत का महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। हमें इस की मुक्ति करना और इसे जन लोकतंत्रिक क्षेत्र बनाना चाहिये। तिब्बत की ओर मार्चिंग करना हमारी पार्टी और हमारी सेना के लिए गौरवान्वित मिशन है। और सैनिक कार्यवाहियों की स्पीड में तेज़ी लानी चाहिये।

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