अध्यापिका फान और उन के दो हजार बच्चे

2017-07-30 19:55:23

अध्यापिका फान और उन के दो हजार बच्चे

दोस्तो, चीन के शिनच्यांग स्वायत्त प्रदेश के शूले काऊंटी में एक बुजुर्ग महिला रहती हैं। जिन का नाम फान यूल्येन है। स्थानीय लोग उन्हें अध्यापिका फान कहकर बुलाते हैं। 20 वर्षों से अध्यापिका फान स्थानीय बच्चों को लगातार मुफ्त शिक्षा देती रही हैं। उन बच्चों की जिन्दगी ज्ञान प्राप्त करने से बदल गयी।

हर रात शिनच्यांग स्वायत्त प्रदेश के शूले काऊंटी की एक छोटी गली में स्थित प्यार कक्षा में किताब पढ़ने की आवाज़ आती है। इस 20 वर्ग मीटर वाले मकान में दसेक बच्चों में कुछ लोग पाठयपुस्तक दोहरा रहे हैं, और कुछ लोग नया ज्ञान सीख रहे हैं। हर दिन वे बच्चे स्कूल से जाने के बाद यहां आते हैं। क्योंकि वे जानते हैं कि एक अध्यापिका हर दिन कक्षा के गेट पर उन का इंतजार करती हैं। यह इस अध्यापिका की 25 वर्ष की एक आदत है। शूले काऊंटी की जनथाई प्राइमरी स्कूल के पांचवें साल पढ़ने वाले छात्र मुज़ाफ़र अदेल ने कहा,वे सब से पहले ब्लैकबोर्ड पर नये शब्द लिखती हैं, फिर गणित पढ़ाती हैं। इस के बाद अध्यापिका फान हमें चीनी पुरातन कविता सिखाती हैं। वे अंग्रेजी भी पढ़ा सकती हैं।

अदेल के मुंह में वह अध्यापिका फान तो फान यूल्येन हैं। इस वर्ष उन की उम्र 75 वर्ष हो चुकी है। कक्षा के अवकाश में बच्चे स्नेह के साथ उन्हें दादी फान बोलते हैं।

25 साल पहले फान यूल्येन बाहर से अपने जन्म स्थान शिनच्यांग के शूले काऊंटी में वापस लौटी। लेकिन स्थानीय बच्चों की शिक्षा पर उन्हें चिंता लगती है। उन के अनुसार,उस समय मैंने देखा कि रास्ते पर बच्चे इधर-उधर दौड़ते थे, और खिड़कियों में पत्थर फेंकते थे। मैं उनकी शैतानी को नहीं देख सकती। तो अंत में मैंने उनसे कहा कि मेरे घर में आओ, और हम एक साथ खेलें, ठीक है न? वे हां कहते थे। शुरू में केवल दो बच्चे थे। मैं उन्हें घर में बुलाकर उन के साथ खेलती थी। और खेलने के दौरान मैं उन्हें शब्द सिखाती थी। धीरे धीरे ज्यादा बच्चे यहां आने लगे।

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