चीन-भारत महिला अधिकार

2017-09-15 18:40:00

चीन सरकार महिलाओं के विकास व प्रगति को बड़ा महत्व देती है और पुरुषों व महिलाओं के बीच समानता को देश के सामाजिक विकास की एक बुनियादी राष्ट्रीय नीति बनायी गयी है। देश की समग्र नीति बनाते समय भी चीन सरकार ने समान भागीदारी, समान विकास और समान कल्याण के सिद्धांत के आधार पर महिलाओं की प्रगति व विकास के लिए दृढ़ राजनीतिक सुनिश्चितता व कानूनी गारंटी प्रदान की है।

पिछली शताब्दी के 90 के दशक के मध्य से चीन सरकार ने क्रमशः पांच व दस वर्षीय चीनी महिला विकास कार्यक्रम बनाकर जारी किये और महिलाओं के कानूनी हितों की कारगर रुप से रक्षा की , चीनी महिलाओं के विकास के लिए सामाजिक वातावरण का सुधार किया और महिला कार्यों की चतुर्मुखी प्रगति को आगे बढ़ाया है। चीनी महिलाएं न केवल राजनीतिक , आर्थिक , सामाजिक व पारिवारिक आदि क्षेत्रों में पुरुषों की ही तरह बराबर हितों व अधिकारों का उपभोग करती हैं, बल्कि सरकार द्वारा बुनियादी मानवाधिकार की रक्षा व सुनिश्चितता देने के एक महत्वपूर्ण भाग के रूप में महिलाओं के विशेष हितों व अधिकारों की रक्षा पर अधिक से अधिक सरकार व समाज का ध्यान गया है। चीन सरकार व समाज के विभिन्न तबकों के समान प्रयास के चलते चीनी महिलाओं का स्थान स्पष्ट रुप से उन्नत हो गया है, महिलाओं की सकल गुणवत्ता पूरीतर सुधर हुआ है, महिलाओं के विकास व प्रगति एक अभूतपूर्व अच्छे काल में प्रवेश कर गए।

अधिकार राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय स्तर पर राज्य के लिए एक मुख्य चर्चा का विषय है। आंतरिक क्षेत्र पर यह व्यक्ति के लिए उचित परिस्थिति और सुविधाये है, जो राज्य द्वारा प्रधान करने पर निर्भर करती है। ज्यादातर आंतरिक परिस्थितियों में इसमें सीमित या असीमित भी दिखाई देती है। इसी सदंर्भ में देश की राजनैतिक व्यवस्था के समझना जरूरी है। जैसे की भारत-चीन के उदाहरण से पता चलता है कि यद्यपि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र का सदस्य होते हुए, अधिकार के अपने संविधान में जगह “मानव अधिकार के घोषणा-पत्र 10 दिसम्बर 1948” के आधार पर दिया। इसी के अनुरूप महिलाओं कि स्थिति की तुलना निम्न रूप से की जा सकती हैः

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