महामारी की स्थिति में वीआर पूजा के लिए उत्सुक भारतीय लोग

2021-05-14 18:25:17

भारत में कोविड-19 की स्थिति दिन ब दिन गंभीर हो रही है। विभिन्न व्यवसाय इससे प्रभावित हुए हैं। लोगों के एक साथ जमा होने से बचने के लिए मंदिर भी बंद हैं। लोग मंदिरों में पूजा नहीं कर पा रहे हैं और धार्मिक रस्म का आयोजन भी नहीं कर सकते हैं। लेकिन बुद्धिमान भारतीय लोगों ने इंटरनेट तकनीक से इस सवाल का हल करने की कोशिश की। इंटरनेट प्लस पूजा भारत में बहुत लोकप्रिय हो रही है।

महामारी के प्रकोप में भारत के विभिन्न मंदिरों में पिछले सालों की तुलना में आमदनी में भारी गिरावट आयी है। भारत में दो तरह के मंदिर होते हैं। सामान्य मंदिरों में लोग जाकर देवी-देवता की पूजा करते हैं, जबकि कुछ धरोहर के रूप में मंदिरों में लोग टिकट खरीदकर अंदर जाते हैं। निसंदेह धरोहर मंदिरों की तुलना में सामान्य मंदिर कोविड-19 से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। उदाहरण के लिए महाराष्ट्र प्रदेश के मशहूर साईं बाबा मंदिर ने गत वर्ष कुल 8868 किलोग्राम के सोने का चंदन प्राप्त किया था, जबकि इस साल महामारी की वजह से केवल 162 ग्राम सोना हासिल किया है।

भारत में करीब सभी लोग धर्म में विश्वास करते हैं, इसलिए देश में बहुत ज्यादा मंदिर हैं, जिन में अनगिनत लोग काम करते हैं या इस पर निर्भर हैं। इसी पृष्ठभूमि में भारत में सॉफ्टवेयर के तकनीशियनों ने इंटरनेट और वीआर तकनीक के सहारे सिलसिलेवार पूजा करने के एप्स का विकास किया।

वीआर विश्वासी, आशीर्वाद का लाइव शो आदि लोकप्रिय एप्स के ब्रांड हैं। अनुयायी विभिन्न मंदिरों, देवताओं और गुरुओं को ढूंढकर अपनी मांग के मुताबिक किसी एक मंदिर का लाइव शो में प्रवेश कर सकते हैं, या किसी गुरु के साथ देवता की पूजा करने की गतिविधि में भाग ले सकते हैं।

भारत में देवता-देवती की पूजा करना जरूरी होता है। लोगों को दैनिक जीवन में पूजा से नहीं अलग कर सकते हैं। शिशु के जन्म से छात्रों के स्कूल जाने तक, शादी से नयी दुकान के खोलने तक, नये वाहन के सड़क पर चलने से कंपनी की स्थापना तक, हरेक महत्वपूर्ण वक्त पर भारतीय लोग पूजा करते हैं। लेकिन भारत में कुछ धार्मिक लोग भी युग के साथ आगे चलते हैं। भारत के अनेक मंदिरों में पहले ही सरकारी वेबसाइटें मौजूद हैं। अनुयायी इंटरनेट के जरिए पूजा करने के समय का बुकिंग कर सकते हैं और इंटरनेट के जरिए पूजा करने के गुरु का चयन भी कर सकते हैं। पूजा करने की रस्म में आवश्यक्त विविध सामग्री जैसे नारियल, ताड़ का पत्ता, चंदन का गूदा, नींबू इत्यादि, की तैयारी अति जटिल हैं, इसलिए मंदिरों के कर्मचारी ऑनलाइन सभी सामग्री बेचने का सुविधा देते हैं। साथ ही भारत के अनेक गुरू केबिल टीवी या इंटरनेट के जरिए अनुयाइयों को धार्मिक ज्ञान बढ़ाते हैं।

वीआर विश्वासी कंपनी की स्थापना 2016 में हुई। महामारी की वजह से इस कंपनी के व्यवसाय का तेजी से विकास हुआ है। धर्म से देवता की दुनिया को वास्तविक दुनिया में परिचित करवाया जा सकता है। सो कुछ हद तक धर्म भी वीआर की एक किस्म की कार्यवाई है, जिससे वास्तविक दुनिया पर असर पड़ सकता है।

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