(इंटरव्यू-तरुण विजय) जानिए, चुनाव परिणाम के बाद कितने आगे बढ़ेंगे चीन-भारत संबंध

2019-05-23 14:06:00

ये चुनाव भारतीय राजनीति में युंगातरकारी चुनाव हैं, जिसके लिए मील का पत्थर बहुत छोटा शब्द है। लेकिन कह सकते हैं कि नए नए अध्याय की शुरूआत होगी। साल 2014 में तीस वर्षों के अंतराल के बाद पहली बार एक गैर कांग्रेसी विपक्षी पार्टी को स्पष्ट बहुत मिला। इसके साथ ही भारत में अल्पमत की अस्थायित्व वाली सरकारों और प्रधानमंत्रियों का दौर भी खत्म हुआ।

तरुण कहते हैं कि वे खुद प्रयास कर रहे हैं कि खुद कुमारजीव के पद चिन्हों पर चीन जाऊं और ह्वेनसांग के पद चिन्हों पर भारत वापस लौटूं। ताकि दोनों देशों की मित्रता के दो अमर आदर्शों को युवाओं के सामने पुनर्जीवित कर सकें।

इसके साथ ही चीन के युवाओं में भारत के प्रति अधिक अच्छी छवि बननी चाहिए। लेकिन दोनों देशों के लोगों के बीच जानकारी का अभाव है। चीनी मीडिया में भारतीय साहित्य, संस्कृति के बारे में अच्छी जानकारी आनी चाहिए, वहीं भारतीय मीडिया में भी चीन को लेकर ऐसा करने की जरूरत है।

(इंटरव्यू-तरुण विजय) जानिए, चुनाव परिणाम के बाद कितने आगे बढ़ेंगे चीन-भारत संबंध

भारत और चीन में सबसे बड़ा अंतर हम यह देखते थे कि चीन ने जो असाधारण आर्थिक व सैन्य प्रगति की, उसका कारण वहां पर स्थायित्व की सरकार का होना रहा। जिसकी नीतियां स्पष्ट रहीं। उन्होंने देश को दूरगामी परिवर्तन की ओर ले जाने में सफलता पायी। जो तीस वर्ष चीन में स्थायित्व के थे, वे भारत में अस्थिरता के रहे। जिसमें अधिकांश सरकारें अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पायीं, जिन्होंने किया भी तो गठबंधन के सहारे।

नरेंद्र मोदी पहले ऐसे प्रधानमंत्री बने, जिन्होंने देश को एक स्थायी, मजबूत और पराक्रमी सरकार दी। मोदी की विदेश यात्राओं और उनके विदेश के प्रति नजरिए ने विदशों में रहने वाले भारतीयों का मनोबल बढ़ाया। इसके साथ ही चीन सहित तमाम विदेशी सरकारों के सम्मुख भारत एक शक्तिशाली और समान अधिकार संपन्न नवीन शक्तिपुंज के रूप में उभरा। जो कि बहुत बड़ा परिवर्तन कहा जा सकता है।

अनिल आजाद पांडेय

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