रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता का समर्थन करता है चीन
चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 8 मार्च को पेइचिंग में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन और जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज़ के साथ वीडियो शिखर वार्ता की। इस दौरान उन्होंने कहा कि यूरोपीय महाद्वीप में फिर से युद्ध के छिड़ने को लेकर चीन काफी दुःखी है और वह रूस व यूक्रेन के बीच संघर्ष को दूर कर शांति वार्ता करने का समर्थन करता है। साथ ही, यूरोप में अपने स्वयं के हितों के आधार पर एक संतुलित, प्रभावी और टिकाऊ यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे की स्थापना को बढ़ावा देने में फ्रांस और जर्मनी का समर्थन करता है। चीन यूरोप, रूस, अमेरिका और नाटो के बीच समानता पर संवाद को देखकर खुश है।
इस वीडियो शिखर वार्ता में यूक्रेन की स्थिति अहम चर्चा का विषय रहा। राष्ट्रपति शी चिनफिंग के कथन ने एक बार फिर चीन का रूख दिखाया, और एक प्रमुख देश के रूप में चीन की वस्तुगत, निष्पक्ष और जिम्मेदार भूमिका जाहिर हुई।
इधर के दिनों में सुप्रसिद्ध अमेरिकी स्तंभकार थॉमस लॉरेन फ्राइडमैन और अमेरिकी राजनीतिक वैज्ञानिक जॉन मियर्सहाइमर जैसे विश्लेषकों ने बताया है कि रूस और यूक्रेन के बीच संघर्ष के लिए अमेरिका को मुख्य जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
वर्तमान में यूक्रेन संकट के समाधान के लिए अमेरिका को शीत युद्ध की विचारधारा को त्यागना चाहिए, अपना उत्तरदायित्व निभाना चाहिए, आग में घी डालने और दूसरों पर दोष मड़ने की कार्यवाही से बचना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक स्थायी सदस्य और एक जिम्मेदार प्रमुख देश के रूप में चीन ने बार-बार यूक्रेन मुद्दे पर अपना रूख व्यक्त किया है और कहा है कि वह शांति वार्ता के संवर्धन के लिए रचनात्मक भूमिका निभाना चाहता है।
मौजूदा वीडियो सम्मेलन में शी चिनफिंग ने दोहराया कि सभी देशों की संप्रभुता और प्रादेशिक अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पालन किया जाना चाहिए। सभी देशों की वैध सुरक्षा चिंताओं को महत्व दिया जाना चाहिए, और संकट को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के सभी प्रयासों का समर्थन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन का मानना है कि सर्वोच्च प्राथमिकता तनाव को बढ़ने या नियंत्रण से बाहर होने से रोकना है। शी चिनफिंग ने यूक्रेन में मानवीय स्थिति पर छह-सूत्रीय पहल प्रस्तुत की और कहा कि यूक्रेन को और मानवीय सहायता प्रदान करने की इच्छा व्यक्त की है।
अब तक रूस और यूक्रेन तीन चरणों में वार्ता कर चुके हैं। हालांकि दोनों के रूख अलग-थलग है, मानवीय मुद्दे को लेकर आम सहमति प्राप्त हुई। चीन ने रूस और यूक्रेन के बीच वार्ता के रुझान को बरकरार रखने का समर्थन करने, अधिकतम संयम बनाए रखने, बड़े पैमाने पर मानवीय संकटों को रोकने की अपील की, और माना कि संबंधित प्रतिबंध सभी पक्षों के लिए अच्छे नहीं हैं। ये पहल न केवल युद्धों को बढ़ने से रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल परिस्थितियों का निर्माण करती हैं।
जैसा कि वीडियो वार्ता में फ्रांसीसी और जर्मन नेताओं ने कहा है कि यूरोप द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से सबसे खराब संकट का सामना कर रहा है। वर्तमान में, यूरोप में भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ रहे हैं, और लाखों यूक्रेनी शरणार्थी पड़ोसी देशों में आ रहे हैं, और शरणार्थी संकट जारी रहने की संभावना है। इसके अलावा, पश्चिम ने रूस पर विभिन्न प्रतिबंध लगाए हैं, और दुनिया भर में जोखिम फैल रहा है, जिससे महामारी से उबरने के लिए संघर्ष कर रही विश्व अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
यूक्रेन की स्थिति लोगों को एक बार फिर याद दिलाती है कि आज की दुनिया बहुत अस्थिर है और विकास कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में दो प्रमुख ताकतों के रूप में चीन और यूरोपीय संघ के पास शांति, विकास और सहयोग की तलाश में समान आवश्यकता है। दोनों पक्षों को अपनी जिम्मेदारियां निभा कर अशांत और बदलती दुनिया में अधिक स्थिरता और निश्चितता पैदा करनी चाहिए।