चीन जीरो कोविड नीति पर क्यों अडिग है?
इस समय चीन ओमिक्रोन वेरिएंट के प्रकोप से जूझ रहा है। रोजाना हजारों की संख्या में कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। लेकिन चीन जीरो कोविड नीति का दृढ़ता से पालन करने पर अडिग है क्योंकि उसे विश्वास है कि उसके प्रयास सफलता की गारंटी देंगे।
देश की राष्ट्रीय परिस्थितियों के अनुरूप, इस नीति ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया है और पिछले दो वर्षों में नानचिंग, थ्येनचिन और शीआन जैसे शहरों में कुछ हफ्तों के भीतर संक्रमण के समूहों को रोकने में प्रभावी साबित हुआ है।
लगभग ढाई करोड़ की आबादी वाला पूर्वी चीन का महानगर शांगहाई अब वायरस के खिलाफ एक प्रमुख युद्ध का मैदान बन गया है। कल ही इस महानगर में 20 हजार से अधिक नए घरेलू संक्रमणों की सूचना मिली है, और मार्च की शुरुआत से इसके कुल संक्रमण के मामले 1,30,000 पार कर गए हैं।
इस नीति के तहत, शहर भर में न्यूक्लिक एसिड टेस्ट करवाने के साथ-साथ कई हफ्तों तक एक अस्थायी बंद प्रबंधन रणनीति को नियोजित किया गया। यह महत्वाकांक्षी दृष्टिकोण देश भर के 38,000 से अधिक चिकित्साकर्मियों की सहायता से संभव हुआ है। इसके पड़ोसी प्रांतों ने भी अतिरिक्त संगरोध स्थान प्रदान किए हैं।
दरअसल, ओमिक्रोन वेरिएंट की दो प्रमुख चिंताएं संचरण की दर और ऐसे लक्षण हैं जिनका पता लगाना कठिन है। लेकिन इसे सामान्य फ्लू के व्यापक मामले के रूप में नहीं माना जा सकता है। मनुष्यों के लिए इसके खतरे को, विशेष रूप से अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों को, अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। यह दुनिया भर में बढ़ती मौतों से स्पष्ट है।
चीन की जीरो कोविड नीति दृष्टिकोण महामारी के प्रभाव और संक्रमणों की संख्या, गंभीर मामलों और मौतों की संख्या को कम करने के लिए तीव्र, दृढ़ और सख्त उपायों का उपयोग करता है। अंतत: इसका उद्देश्य कम से कम समय में महामारी को नियंत्रण में लाना है।