चीन सक्रियता से लगा है ओजोन परत के संरक्षण में

2021-05-14 18:25:12

16 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय ओजोन परत संरक्षण दिवस है ।इस साल का मुख्य विषय था कि जीवन की रक्षा करने वाला ओजोनः ओजोन परत संरक्षण की 35वीं वर्षगांठ। इसका मुख्य अभिप्राय वर्ष 1985 में संपन्न ओजोन परत संरक्षण के वियना समझौते की याद करना था ।तीस से अधिक वर्षों में चीन ने सक्रियता से इस समझौते का पालन कर ओजोन परत संरक्षण और ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम करने में बड़ा योगदान दिया है ।

वायु में ओजोन परत ऐसी है जहां ओजोन की घनता अधिक ऊंची है ।ओजोन सूर्य प्रकाश के कुछ पराबैगनी किरणों को सोख सकता है ,जिससे पृथ्वी पर रह रहे जीव जरूरत से ज्यादा पराबैगनी किरणों के नुकसान से बच सकते हैं ।वैज्ञानिक अनुसंधान से पता चला कि कूलिंग एजेंट और फ़ोमिंग एजेंट जैसे रासायनिक वस्तुओं के व्यापक प्रयोग से ओजोन का खपत करने वाला पदार्थ ओडीएस बड़ी मात्रा में निकाला जाता है ,जिस से ओजोन परत पर गंभीर नुकसान पहुंचता है । बताया जाता है कि अगर ओज़ोन परत में 1 प्रतिशत बढ़ोतरी होती है ,तो मानव में त्वचा कैंसर की दर 4 से 6 प्रतिशत बढ़ती है और अंधा होने वालों की संख्या 10 हजार से 15 हजार से बढ़ती है ।अगर ओजोन परत की मोटाई 25 प्रतिशत घटेगी ,तो सोयाबीन की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत कमी आएगी ।इस के अलावा ओजोन परत नष्ट होने के बाद जलवायु पर बुरा असर पड़ेगा और मानव के अस्तित्व तथा विकास का पर्यावरण आपदा का सामना करेगा ।

पिछली सदी के 80 वाले दशक में दक्षिण ध्रुव के ऊपर ओजोन होल निकलने के बाद चीन समेत अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस मुद्दे पर बड़ा ध्यान दिया ।अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने वर्ष 1985 में ओजोन परत संरक्षण पर वियना समझौता बनाया ,जिस ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ओजोन परत की सुरक्षा के सिद्धांत निर्धारित किये ।वर्ष 1987 में अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने मांनट्रियल संधि बनायी ,जिस ने ओजोन परत संरक्षण पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग का ढांचा तय किया ।

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