ई जाति की बहू अल्पसंख्यक जाति की उद्यमिता नेता बन गयी

2021-05-14 18:25:16

सुबह छा क्वांगजू ई जाति के लोक गीत गुनगुनाती हुई अंगूर की स्थिति देखने के लिये अपने ग्रीनहाउस में आयीं। क्योंकि अंगूर की फसल का मौसम आने वाला है। इसलिये उन का मन उम्मीदों से भरा हुआ है। सुश्री छा चीन के चच्यांग प्रांत के निंगबो शहर में स्थित श्यांगशान काऊंटी में अल्पसंख्यक जाति संघ की उपाध्यक्ष हैं। वे युन्नान प्रांत से यहां आकर एक स्थानीय बहू बन गयीं।

श्याओथांग गांव में रहने वाले 20 वर्षों में सुश्री छा ने न सिर्फ़ खेती के क्षेत्रफल को पांच गुना बढ़ाया, और अंगूर की किस्मों को रंगारंग बनाया, बल्कि उन्होंने अपने पति के सभी कर्ज चुका दिया है, और पुराने मकानों का पुनर्निमाण भी किया। अब वे शुद्ध श्यांगशान बोली बोल सकती हैं, और अल्पसंख्यक जाति की महिलाओं का नेतृत्व करके अमीर जीवन बिताने के लिये मेहनत कर रही हैं।

छा क्वांगजू का जन्म युन्नान प्रांत के फ़ंगछिंग काऊंटी में हुआ है, जो श्यांगशान काऊंटी से 3000 किलोमीटर दूर है। बचपन में ही उन के पिता का देहांत हो गया था। इसलिये वह एक बहुत स्वतंत्र व मजबूत महिला बन गयीं। वर्ष 2002 में उनकी काम के सिलसिले में श्यांगशान से युन्नान आये वांग य्वेएमिंग से मुलाकात हुई। फिर दोनों के बीच प्यार हो गया। लेकिन बाद में वांग य्वेएमिंग के हाइड्रोपावर इंजीनियरिंग में दुर्घटना होने के कारण वांग को 4 लाख युआन से अधिक कर्ज लेकर श्यांगशान वापस लौटना पड़ा। उसी समय सुश्री छा झिझक के बिना बैग पैक करके वांग य्वेएमिंग के साथ श्यांगशान आयीं।

उसी समय जब सुश्री छा पहली बार श्यांगशान पहुंची, तो खराब मकान व पुराना आंगन उन की नज़र में आये। पर सब से दुखी बात यह है कि घर में रहने के पहले दिन में कोई कर्ज लेने के लिये आया था। ऐसी स्थिति में वांग य्वेएमिंग के मन में छा क्वांगजू को युन्नान वापस भेजने का विचार पैदा हुआ। लेकिन सुश्री छा के आग्रह से वे दोनों अंत में एक साथ सभी मुश्किलों को दूर किया।

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